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Tuesday, January 19, 2021
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उत्तराखंड में हो रही घटनाओ और आम मुद्दों पर जनता आवाज क्यों नहीं उठा रही?

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उत्तराखंड राज्य को बने हुए 20 साल पुरे होने को हैं पर राज्य जिन चीज़ों और जिन उम्मीदों से बना था वो उम्मीदें आज भी वही की वही रह गई सरकारें आती गई जाती गई नेता लोग मजे में रहे और जनता आम सुविधाओं से अब भी बेहाल |

उत्तराखंड राज्य का अधिकांश भौगोलिक भू-भाग पर्वतीय क्षेत्रों में है और इसी के तहत उत्तराखंड उत्तरप्रदेश से अलग होकर एक राज्य बना ताकि हमारे पर्वतीय क्षेत्रों का विकाश हो पाए पर शायद ये उम्मीद एक उम्मीद ही बनी रह गई |

एक पर्वतीय राज्य होने के तहत उत्तराखंड में आये दिन जंगली जानवरों का लोगों और मासूम बच्चों पर हमला होने की ख़बरें आती रहती है साथ ही जंगली जानवरों से खेती बड़ी में हो रहे नुकसान को तो छोड़ ही दो क्यूंकि जब जान ही नहीं रहेगी तो खेती बड़ी का करेंगे क्या?

सोमवार 3 अगस्त को जब सब लोग रक्षाबंधन मना रहे थे तो उसी श्याम को उत्तराखंड के टिहरी जिले के प्रताप नगर विकासखंड के देवल गांव में एक आठ साल की मासूम बच्ची “पूजा” को गुलदार (तेंदुए) ने अपना निवाला बना दिया। यह कोई पहली घटना नहीं है जो आपने सुनी न हो पर यह एक मनन करने की बात है आये दिन उत्तराखंड के पर्वतीय के क्षेत्रों में जंगली जानवरों के हमले बढ़ते जा रहे है चाहे आप अपने घर में हों तो सोचें जो महिलाऐं घास-लकड़ी के लिए जंगल में जाती होंगी वो कैसे सुरक्षित होंगी |

गुलदार के हमले में आठ साल की बच्ची की मौत Tehri News

देवल गांव निवासी प्रकाश नौटियाल की आठ साल की बेटी पूजा शाम करीब 7:15 बजे खेलने के बाद घर जा रही थी। इस दौरान वह साथ चलते बच्चों से कुछ पीछे रह गई। काफी देर तक जब पूजा घर नहीं पहुंची तो उसके परिजनों ने आस पड़ोस में पूछा थोड़ी देर में सभी गांव वाले पूजा को आसपास खोजने लगे। लगभग 8:30 बजे गांव के पास ही पूजा का अधखाया शव बरामद किया गया। इस घटना से ख़ुशी का दिन मातम में बदल गया। बच्ची के गले में गहरे जख्म होने के कारण उसकी मौत हुई है। एसडीएम प्रतापनगर रजा अब्बास ने बताया कि गुलदार ने बच्ची के ऊपर हमला किया है और गांव में टीम भेजी जा रही है। गुलदार के बच्ची को निवाला बनाने की घटना से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने सुरक्षा की मांग की है।

आपको जानकारी और आंकड़ों के अनुसार बतां दें कि जंगली जानवरों के डर से लगभग 6% लोगों ने राज्य छोड़ दिया और उत्तराखंड में मानव-जंगली जानवरों के संघर्ष के मामलों की दर देश में सबसे अधिक है। इस खतरे की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि तेंदुए के हमले से 600 से अधिक मौत और 3100 से अधिक लोग घायल हुए हैं और ये पिछले 17 वर्षों का ही आंकड़ा है इसमें भालू, जंगली सुवर इनके मामले तो शामिल ही नहीं हैं।

अब बात करते है जब सरकार वन विभाग को यह बात ज्ञात है की पर्वतीय क्षेत्रों के गावों में जंगली जानवरों से आम जन मानस को जान का खतरा है तो सरकार और वन विभाग सुरक्षा क्यों नहीं प्रदान करता क्यूंकि जब दुर्लभ जंगली जानवरों के लिए सरक्षण केंद्र बनाये जा सकते तो क्या इंसान की जान बचने के लिए इन जंगलो की घेराबन्धी नहीं की जा सकती जिससे इनका गांव में आना जाना न हो।

कब तक पहाड़ के लोग अपनी जान हाथ में रख कर अपना जीवन यापन करते रहेंगे ?

आज अंतर्राष्ट्रीय समाज सेवी रोशन रतूड़ी जी ने इस मामले में आवाज उठाई है उन्होंने देखा की उत्तराखंड के लोग नेता लोगों की चाटुकारिता में इतने मग्न हो गए हैं की उन्हें अपने घर गांव की समस्या तक नजर नहीं आती अगर आती भी तो कैसे आवाज उठाएंगे कहि नेताजी नाराज न हो जाएँ उनसे रोशन रतूड़ी जी ने बोलै की 8 साल की पूजा अपने घर में भी सुरक्षित नहीं है वो भी श्याम के 7 बजे अब बताओ कैसे पूजा और अन्य कई जो जंगली जानवरो का शिकार हुए है उनका जान मान की हानि की भरपाई सरकार कर पायेगी। सभी की उत्तराखंड सरकार और वन विभाग से मांग की है की पूजा की जान वापस नहीं लायी जा सकती पर पूजा के परिवार को 50 लाख का मुआवज़ा सरकार प्रदान करें और भविष्य में ऐंसी घटना दुबारा हो तो उससे पहले ही जंगल की घेराबन्धी करे।

आखिर कब तक बाघ व तेदुआं लोगों को अपना शिकार बनाता रहेगा क्या उतराखंड सरकार व वन विभाग के पास इसका कोई जबाब है ? कल फिर एक और दर्दनाक हादसा हुआ ,शाम 6 बजे ,प्रताप नगर तहसील , उतराखंड के ग्राम पंचायत देवल मैं 8 साल की मासूम बच्ची पूजा जी पर तेंदुए ने हमला किया जिससे मासूम पूजा जी की मौत हो गई । ज़रा सोचो क्या बिती होगी उस मासूम बच्ची पर । क्या क़सूर था उसका ? उस परिवार की कया हालत होगी जिन्होंने अपनी फूल सी मासूम बिटीया को खो दिया है । उतराखंड सरकार वो वन विभाग को पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देकर और साथ ही 50 लाख रूपये पीड़ित परिवार को मुआवज़ा दिया जाये । देंवगत पूजा नौटियाल जी श्री प्रकाश नौटियाल जी की बिटीया थी जो अब हमारे बीच मै नहीं रही । भगवान उसकी आत्मा को शान्ति दे । 😭😭😭😭🌺🌺🙏#RR #International #SoCial #worker

Posted by Roshan Raturi RR on Tuesday, August 4, 2020

उत्तराखंड में बताने को कोई एक समस्या है नहीं और ऐंसा है नहीं की इन समस्याओं से आप वाकिफ हो न तो फिर आप अपने हक़ के लिए कब बोलोगे?

उत्तराखंड में खेती बाड़ी से लेकर आम जान मानस को जान का खतरा अलग है वही दूसरी और देखे तो सरकारी व्यवस्थाएं ठप पड़ी हुई हैं। इस लॉकडाउन में सरकार जहाँ स्कूलों में ऑनलाइन पढाई की बात कर रही ही वही उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कुछ हिस्से ऐसे भी है झा आजतक मोबाइल नेटवर्क पहुंचा ही नहीं जहाँ पहुंचा हुआ है वहां इंटरनेट चलने न चलने के सामान है।

अब बात स्वस्थ्य सेवाओं की करें तो इसका भी खस्ता हाल है पर्वतीय क्षेत्रों में पहले तो हॉस्पिटल न के बराबर हैं और जो है भी वो किसी काम के हैं नहीं क्यूंकि इलाज के लिए आज भी लोगो को ऋषिकेश देहरादून ही आना पड़ता है। कुछ कुछ हॉस्पिटल ऐसे भी है जहा पर डॉक्टर कभी कबार ही मौजूद रहता है।

आपको बतां दें अभी हल ही में कुछ मामले ऐसे आये और आप सबने सोशल मीडिया पर देखे ही होंगे लोगों के गावों में सड़क तक नहीं थी तो इस लॉकडाउन में लोगों ने खुद ही सड़क निर्माण कर दी और सरकार को शर्म तक नहीं आ रही है।

सड़क के अभाव के कारण ऐसे क्षेत्र अन्य सेवाओं से भी वंचित है और अगर यहाँ पर कोई मेडिकल इमरजेंसी होती है तो उसमे मौत होने का मुख्य कारण पहले सड़क कनेक्टिविटी की सुविधा ही है।

रोजगार की तो बात ही क्या करें इससे आप सभी वखिफ है बीते सालो से सरकार रोजगार के नाम पर युवाओं को रोजगार का लॉलीपॉप पकड़ा देती है।

अंत में एक बार आप इन मुद्दों को ध्यान में रखे और सोचें जरा की अगर आप इन मुद्दों पर नहीं बोलेंगे तो कौन बोलेगा ?
आये दिन जंगली जानवर किसी भी जान ले लेते है और सरकार चुप्पी साढ़े बैठी है , बीते दिन टिहरी जिले के हिंडोलखाल के निकटा ग्राम सभा खेड़ागाड में एनएच-94 का भारी-भरकम पुश्ता ढहने के कारण उसके नीचे लगा दो मंजिला भवन मलबे की चपेट में आ गया था जिसमे धर्म सिंह नेगी जी के ३ बच्चों की मौत हो गई थी इस पर भी सरकार चुप्पी साधे बैठी है धर्म सिंह नेगी जी ने पुस्ते के जेई से बार बार बोला था की यह ठीक नहीं है ये कभी भी माकन के ऊपर गिर सकता मगर जेई अपनी अकड़ में बोलकर चला जाता की आप जेई को मत बताओ।

अब आप बताओ कल के दिन ये आपके साथ भी हो सकता तो कौन आवाज उठाएगा इन मुद्दों पर एक बार फिरसे देवल गांव निवासी प्रकाश नौटियाल की आठ साल की बेटी और हिंडोलाखाल के खेड़ागाड गांव के धर्म सिंह नेगी जी के बच्चों के लिए सरकार से आग्रह करें की इनको 50 लाख का मुआवज़ा प्रदान करें तथा परिवार के किसी सदस्य को सरकार नौकरी दे और भविष्य में ऐंसी होने वाली घटनाओ से पहले ही सचेत रहे।

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