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Tuesday, January 26, 2021
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गोरखा कम्युनिटी इंडियन आर्मी में क्यों जाना चाहती है? यह जानने के लिए चीन ने नेपाल के एनजीओ को फंड दिया

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नेपाल की गोरखा कम्युनिटी के युवाओं के इंडियन आर्मी में शामिल होने से चीन परेशान है। इस कारण चीन ने गोरखा युवाओं पर स्टडी के लिए काठमांडू के एक एनजीओ को 12.7 लाख नेपाली रुपए दिए हैं। चीन यह पता लगाना चाहता है कि गोरखा समुदाय के युवा इंडियन आर्मी जॉइन करने के लिए क्यों उतावले रहते हैं।

सूत्रों ने कहा- जून के पहले हफ्ते में नेपाल में चीन की राजदूत होउ यानकी ने नेपाली एनजीओ चाइना स्टडी सेंटर (सीएससी) को फंड दिया है। उन्हें कई चीजों पर स्टडी करने के लिए कहा गया है, जैसे नेपालियों के भारतीय सेना में शामिल होने के कारण, नेपाल के ऐसे इलाके जहां ये भर्तियां होत हैं और उनके सामाजिक और आर्थिक असर जैसे टॉपिक शामिल हैं।

ब्रिटिश आर्मी में 4 गोरखा रेजिमेंट्स

इंडियन आर्मी में सात गोरखा रेजिमेंट्स हैं। इनमें लगभग 28,000 नेपाली नागरिक शामिल हैं। रेजिमेंट्स की कुल 39 बटालियन हैं। कुल मिलाकर, 11 गोरखा रेजिमेंट थीं, जिनमें से चार आजादी के बाद ब्रिटिश सेना में चली गईं।

भारत में पहली, तीसरी, चौथी, पांचवीं, आठवीं, नौवीं और 11वीं गोरखा रेजीमेंट हैं, जबकि ब्रिटिश आर्मी के पास दूसरी, 6वीं, 7वीं और 10वीं रेजीमेंट हैं। गोरखा समुदाय में मुख्य रूप से चार अलग-अलग जनजातियां शामिल हैं – खस (या चेत्री), गुरुंग, लिम्बुस और रायस।

1947 के समझौते का कोई मतलब नहीं: ओली

नेपाली गोरखों की इंडियन आर्मी में भर्ती 1947 में भारत, ब्रिटेन और नेपाल के बीच समझौते के बाद शुरू हुई। लेकिन, अब नेपाल का कहना है कि इस समझौते का कोई मतलब नहीं है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री थेरेसा मे के साथ मुलाकात के दौरान पहली बार इस मुद्दे को उठाया था।

नेपाल में भारत विरोधी कैंपेन

सूत्रों ने यह भी कहा कि नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी-बिप्लब (प्रतिबंधित अंडरग्राउंड विद्रोही संगठन) ने नेपाल के युवाओं को गोरखा रेजीमेंट में शामिल होने से रोकने के लिए अभियान शुरू किया है। सीपीएन-बिप्लब की कल्चरल विंग भारत विरोधी कैंपेन चला रही है। इसके लिए नुक्कड़ नाटक, लोक नृत्य और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहे हैं।

लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा ​​​को लेकर​​​​ विवाद

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा 8 मई को उत्तराखंड के धारचूला से लिपुलेख दर्रे को जोड़ने वाली 80 किमी लंबी सड़क के उद्घाटन के बाद भारत और नेपाल के बीच तनाव शुरू हो गया है। नेपाल ने सड़क के उद्घाटन का विरोध किया। यह दावा किया कि यह उसके क्षेत्र से गुजरता है। इसके कुछ दिनों बाद नेपाल ने एक नया नक्शा भी जारी किया, जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को नेपाल में दिखाया गया।

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