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Saturday, October 24, 2020
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जिसने देवभूमि उत्तराखंड और माँ-बहनों का अपमान किया है उस नक़ली चैंपियन को वापस पार्टी मैं क्यों लेना पड़ा ? क्या थूक के चाटना इसे ही कहते हैं ?

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बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय समाज सेवी रोशन रतूड़ी ने इसके खिलाफ अपने फेसबुक लाइव में आकर अपनी बात राखी और भरी आपत्ति जताई की कैसे राजनीतिक पार्टी अपने निजी फायदे के लिए उत्तराखंड को अशब्द कहने वाले एक नेता को एक बार निष्काषित कर लेती है और चुनाव आने से पूर्व उन्हें पुनः पार्टी में दुबारा सम्मिलित कर लेती है। सोचने की बात तो ये हे की उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य हिमाचल में भी अनेकों राजनीतिक पार्टियां आती जाती रहती पर उत्तराखंड और हिमाचल में फर्क दीखता है की हिमाचल में पलायन जैसे मुद्दे देखने को नहीं मिलते स्वरोजगार के तमाम साधन है पर उत्तराखंड जो की देवभूमि होने पर भी दुनिया भर के शरणार्थी यहां आते है इस देवभूमि को प्रणाम करते है जहा देवी देवताओ का वास माता बहनो का सम्मान होता है। राजनितिक पार्टी से ऊपर उठकर सोचना चाहिए जनता के लिए कोई नहीं सोचता राजनीतिक पार्टियां सिर्फ अपना और अपने गुर्गों के अलावा किसी और का कुछ सोचते ही नहीं एक बार चुनाव हो जाता है फिर वो लोग दुबारा दिखाई तक नहीं देते है 5 साल में कभी एक पार्टी आएगी तो अगले 5 साल दूसरी नेता वही हैं बस पार्टी के नाम अलग अलग है।

अंतर्राष्ट्रीय समाज सेवी रोशन रतूड़ी ने बताया की ऐसे कैसे कोई व्यक्ति चैंपियन बन जाता है जिसके मुँह में माँ बहन की गालिया हैं जो अपनी जन्मभूमि का सम्मान नहीं करता उस देवभूमि का जिसका देश विदेश के कंही श्रद्धालु सम्मान करते है उसको ऐसे लोग गाली देकर खुदको चैंपियन बता रहे है पहले सरकार इनको 6 साल के लिए निष्काषित करती है और अंतर 13 महीने में वापस पार्टी में सम्मिलित कर लेती है कैसे सरकार लोगो की भावनाओ से खेल रहे है इनके हाथों में जो तीन-तीन बंदूके है वो कैसे 1 व्यक्ति को तीन बंदूकों का लाइसेंस दे दिया इसका मतलब यही हुआ की पहले किसी का मर्डर करलो फिर माफ़ी मांग लो क्या इसी को थूक के चाटना कहते है ?

जिसने उतराखंड की माँ-बहनों का वो देवभूमि उत्तराखंड का अपमान किया है ।आख़िर पार्टी की ऐसी क्या मजबूरी थी, जो नक़ली चैंपियन को वापस पार्टी मैं लेना पड़ा ? पार्टी ने कितना पैसा लिया चैंपियन से ? नक़ली चैंपियन को पार्टी मै वापस लेकर पार्टी ने सभी उतराखडीं वासियों का अपमान किया है ।ऐसे लोगों को उतराखंड से बहार भेज देना चाहिए । दूसरी बात नक़ली चैंपियन के पास इतने सारे तमंचे व रिवाल्वर क्यों है ? क्यों उसके पास इतने सारे हथियार है ?#RR #International #SoCial #worker

Posted by Roshan Raturi RR on Tuesday, August 25, 2020

सरकारें आती जाती रहती है ये जनता सब जानती है अगर उत्तराखंड वासी चुप है तो इसका मतलब ये नहीं की आप लोगों को बेवकूफ बनाते रहो उत्तराखंड की जनता समझदार है जो इन मामलों में नहीं पड़ती है। रोशन रतुरी जी ने वंशीधर भगत से पूछ की कैसे आपने ऐसे व्यक्ति को दुबारा पार्टी में शामिल कर लिया जो देवभूमि को गालिया रहे है। उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए लोगो ने अपनी जान की कुर्बानियां दी है अगर आप उन राज्य आंदोलन करियों को न्याय नहीं दिला सकते तो कम से कम ऐसे लोगो को देवभूमि से तो दूर रखो। इन्ही जैसे लोगो की वजह से पहाड़ों में क्राइम बढ़ रहा है अगर जैसे राजनीतिक पार्टी अपने फायदे के लिए अपने नेताओ का ध्यान रख रही उतना ध्यान जनता का क्यों नहीं रख सकती जो जनता आपको चुन उस सीट पर बैठती है और फिर आप चुनाव समाप्त होने पर ५ साल के लिए गायब हो जाते है ये कोई असली चैंपियन के खासियत तो नहीं है पर ये एक नकली चैंपियन जरूर है।

राज्य का गठन होने के बाद उम्मीदें जगीं परन्तु जो पलायन राज्य के गठन से पहले से शुरू था उस पर कोई भी कमी नहीं आयी| धीरे-धीरे लोग अपने घर छोड़कर दूसरे शहरों में बसते चले गए। वर्ष 2000 में जो नयी सरकार बनी उसने कई प्रकार की योजनाए लेकर आयी, कई प्रकार के उद्योग धंधे पहाड़ पर शुरू करने की कोशिश की गयी, कई कंपनी कारखानों से पहाड़ पर अपनी इकाइयां शुरू करने की बात कही गयी, लेकिन सब बस बात ही तक ही रही| आगे नहीं बढ़ सकी| और जो कंपनियां इच्छुक ठीक भी पहाड़ो पर अपनी इकाइयां स्थापित करने के लिए लेकिन उन्हें सरकार द्वारा सहूलियतें न मिल पाने के कारण वो पहाड़ नहीं चढ़ सकी।

क्या कहती है पलायन आयोग की रिपोर्ट

वर्ष 2001 से 2011 तक जनपद के 1022 ग्राम पंचायतों में 53611 लोगों ने पूर्ण रूप से पलायन नहीं किया है। ये लोग समय-समय पर अपने पैतृक गांव आते हैं। जबकि 646 पंचायतों में 16207 लोगों ने स्थायी रूप से पलायन किया है। अब इन लोगों के दोबारा वापस गांव लौटने की संभावनाएं नहीं हैं। पलायन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के हजारों गांव पूरी तरह खाली हो चुके हैं. वहीं 400 से अधिक गांव ऐसे हैं, जहां 10 से भी कम नागरिक हैं और 2018 तक 1734 गांव खाली हो चुके थे।

Palayan Aayog Report Released 16207 People Of Uttarakhand Left Village  Permanently - पलायन आयोग की रिपोर्ट में खुलासा, अल्मोड़ा के 16207 लोग  स्थायी रूप से छोड़ चुके हैं गांव - Amar Ujala ...

ये सब मूलभूत सुविधाओं की कमी की वजह से है अगर आप उत्तराखंड के किसी गांव तो छोड़ो अगर राजधानी में भी सरकारी स्कूलों हॉस्पिटलों में जाये तो वहां भी आपको ढंग की सुविधाएँ देखने को नहीं मिलेंगी तो आप अनुमान लगा लीजिये कैसे सुदूर इलाके पहाड़ों में लोग अपना जीवन व्यापन करते होंगे जहां न रोजगार का कोई उचित साधन है स्कूल हैं तो टीचर नहीं हैं, कहीं हॉस्पिटल हैं भी तो वह डॉक्टर गायब हैं, बहुत से गांव अभी भी सड़क से वंचित है, पिने के पानी तक की सुविधाएँ नहीं है आजकल बरसात में आये दिन पहाड़ों में बदल फटने जैसी घटनाएं होती रहती है तो कुछ गांव ऐसे भी है जहाँ नदी-नाले तैरने के लिए सरकारों द्वारा अभी भी आवाजाही के लिए पुल तक नहीं बनाये गए अब ऐसे में लोग कैसे गांव में रहेंगे जिसकी आर्थिक स्थिति ठीक रहती वो शहरों की और अपना ठिकाना ढूंढ़ने लग जाता है।

कौन है ये चैंपियन? चैंपियन जो जिस थाली में खता उसी में छेद करता या जिस माँ की कोख में पनपता उसी को गाली देता?

उत्तराखंड खानपुर विधानसभा सीट से 2012 में इन्हे कांग्रेस पार्टी से टिकट मिला और इन्होने जीत हासिल की फिर मई 2016 में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सरकार के खिलाफ बगावत करके इन्होने भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन करली फिर उन्हें 2017 के चुनाव के बाद भाजपा से चुने जाने के लिए दलबदल विरोधी कानून के तहत एक विधायक के रूप में अयोग्य ठहराया गया था।

कुंवर प्रणव सिंह शुरू से ही विवादों में रहे है चाहे वो पूर्व सरकार के साथ बगावत हो या अपने कार्यालय में महिला का डांस करवाना हो और भी कहीं विवादित टिप्पणियों से घिरे हुए है।

चैंपियन का वीडियो वायरल

बार—बार विवादों में घिरे रहने वाले विधायक चैंपियन का एक विवादास्पद वीडियो सामने आने के बाद उन्हें पिछले साल 17 जुलाई को बीजेपी ने पार्टी से छह साल के लिये निष्कासित कर दिया था. वायरल वीडियो में विधायक फिल्मी गाने पर डांस के दौरान वह हाथों में बंदूक लिए थे। साथ ही दो पिस्टल भी उनके हाथ में दिखाई दीं। बाद में एक पिस्टल मुंह में दबाकर भी वो डांस करते नजर आए। इस दौरान शराब पीते भी दिखाई दिए। डांस के दौरान चैंपियन ने अभद्र भाषा का भी प्रयोग किया। साथ ही, उत्तराखंड के बारे में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग भी उन्होंने इस वीडियो में किया। इतना ही नहीं उनके साथ वीडियो में तीन-चार और लोग भी शामिल थे।

अब बीजेपी ने सोमवार को हरिद्वार जिले के खानपुर से विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन का निष्कासन रद्द करते हुए उन्हें वापस पार्टी में शामिल कर लिया. प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बंशीधर भगत ने यहां यह घोषणा की. चैंपियन का पार्टी में स्वागत करते हुए भगत ने कहा, ‘अपने आचरण के लिए क्षमा मांगने के बाद चैंपियन का निष्कासन रद्द कर दिया गया है’. उन्होंने बताया कि चैंपियन को पार्टी में वापस लेने का निर्णय 13 माह के निष्कासन के दौरान उनके अच्छे आचरण के आधार पर पार्टी ने सामूहिक रूप से कोर कमेटी की बैठक में लिया. पार्टी में वापसी से खुश चैंपियन ने कहा कि बीजेपी से बाहर रहते हुए भी वह पार्टी के लिए ही काम करते रहे. चैंपियन में अपने खराब बर्ताव के लिए मीडिया के सामने भी माफी मांगी. गौरतलब है कि उनके खिलाफ लगे कई आरोपों में से एक मीडिया के साथ अभद्र व्यवहार भी था।

अब जनता को यह खुद ही तय करना होगा की कैसे राजनीतिक पार्टी अपने फायदे के लिए किस हद तक जा सकती है फिर वो आपसे किये गए चुनावी जुमले ही क्यों न हो। ऐसे लोगो को देवभूमि से दूर रखे ये देवभूमि को नर्क बना देंगे और आने वाले चुनाव में राजनीतिक पार्टी न देख कर अपने लोगो को ही चुने जो आपके लिए काम करे किसी राजनीतिक पार्टी का नाम होने से आपको कोई फायदा होने वाला नहीं ये आएंगे और निकल लेंगे अपने गुर्गों का भला करेंगे आप ऐसे लोगो के खिलाफ आवाज उठाये और अपने उत्तराखंड निवासी को ही मौका दे ऐसे गाली गलोच करने वालो को अगर आपने मौका दिया तो कल कत्लेआम गुंडागर्दी होने में भी देरी नहीं है। जनता को एक जुट होकर अपने अधिकार का सही इस्तेमाल करना चाहिए चंद निजी फायदों के लिए अपना कीमती वोट न बिकने दें और अपनी समस्याओं को चुनावी उम्मीदवार के सामने रखे।

 

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