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Tuesday, April 20, 2021
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उत्तराखंड: कोरोना काल में नहीं हो सका कीड़ाजड़ी का चुगान, इतने करोड़ो का हुआ नुकसान, चीन ने उठाया फायदा ! जानिए

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कोरोना काल के चलते इस बार उत्तराखंड में कीड़ाजड़ी यानी यारशागुंबा का चुगान नहीं हो पाया। इससे स्थानीय लोगों की आजीविका चौपट होने के साथ में राज्य सरकार को भी राजस्व की बड़ी हानि हुई है। एक अनुमान के मुताबिक कीड़ा जड़ी का दोहन न होने से उत्तराखंड को 500 करोड़ से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा है। दूसरी ओर चीन को इसका पूरा फायदा मिला है। वह कीड़ा जड़ी के कृतिम उत्पादन के जरिए बड़े मुनाफे की ओर बढ़ रहा है।

अप्रैल से कीड़ा जड़ी के चुगान के लिए वन विभाग द्वारा लाइसेंस जारी किए जाने थे लेकिन लॉकडाउन ने सब कुछ बिगाड़ दिया। न रजिस्ट्रेशन हो पाए और न ही हिमालयी क्षेत्र में कीड़ा जड़ी का चुगान हो पाया। खासकर पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में यह बहुतायत में होती है। पिथौरागढ़ जिले में 37 और बागेश्वर जिले की छह वन पंचायतों द्वारा कीड़ा जड़ी का चुगान किया जाता है। इसके लिए सरकार लाइसेंस भी जारी करती है।

चीन को मिला फायदा

कीड़ा जड़ी की दुनियाभर में मांग है और उत्तराखंड में इसका उत्पादन बहुतायत में होता है। चीन हर साल उत्तराखंड से अधिक से अधिक माल उठा लेता है और बढ़ी हुई कीमत में उसे दूसरे देशों को बेचता है। बढ़ती मांग और अधिक कीमत के चलते चीन ने इसका बड़े पैमाने पर कृतिम उत्पादन भी शुरू किया है। इस बार उत्तराखंड, नेपाल के हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक जड़ी का दोहन न हो पाना चीन के कृतिम बाजार के लिए वरदान साबित हुआ है। चीन दूसरे देशों के सामने अपने कृतिम कीड़ा जड़ी का विकल्प पेश कर रहा है। इसकी कीमत प्राकृतिक जड़ से कम भी है और चीन का दावा है कि उसके कृतिम कीड़ा जड़ी में सारे गुण प्राकृतिक की तरह ही मौजूद हैं। चीन दूसरे देशों को इस बार बड़े पैमाने में अपनी कृतिम सप्लाई करने जा रहा है।

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