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Tuesday, January 19, 2021
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उत्तराखंड: पहाड़ की इस बेटी ने किया देवभूमि का नाम रोशन, IIT दिल्ली में हुआ असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में चयन

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आज उत्तराखंड के युवा देश-विदेश में हर क्षेत्र में देवभूमि का नाम रोशन कर रहे हैं। अपने प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले उत्तराखंड के युवा न केवल अपनी काबिलियत का प्रदर्शन कर रहे हैं बल्कि देवभूमि के नाम का परचम भी लहरा रहे हैं। अपनी काबिलियत और मेहनत से उत्तराखंड का युवा वर्ग नए-नए मुकाम हासिल कर रहा है। खासकर की उत्तराखंड राज्य की बेटियां लगातार हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपना नाम सफल लोगों की सूची में दर्ज करा रही हैं। शिक्षा से लेकर खेल तक, हर जगह लड़कियां जीत का डंका बजा रही हैं। इसी कड़ी में अपना नाम जोड़ा है राज्य की एक होनहार बेटी ने। हम बात कर रहे हैं राज्य के अल्मोड़ा जिले के बिंता गांव की मूल निवासी डॉ मनीषा ठकुरानी जोशी की जिनका चयन हाल ही में आईआईटी दिल्ली के भौतिक विज्ञान में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में हुआ है।

मनीषा जोशी के आईआईटी जैसे टॉप इंजीनियरिंग इंस्टिट्यूट में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के बाद से ही उनके परिवार में हर्षोल्लास का माहौल है और उनके पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है। उनकी इस उपलब्धि से उनके पूरे बिंता गांव में भी खुशी की लहर छाई हुई है और सभी ग्रामीणों के बीच में हर्ष एवं उल्लास का माहौल है। गांववासियों का कहना है कि मनीषा की इस बड़ी उपलब्धि से न केवल गांव का नाम रोशन हुआ है बल्कि यह अल्मोड़ा के साथ साथ समूचे उत्तराखंड के लिए भी है एक गौरवशाली बात है।

उनकी मां शकुंतला देवी और पिता होशियार सिंह भी अपनी होनहार बेटी की उपलब्धि से काफी खुश हैं। मनीषा के पति हिमांशु जोशी स्वयं अमेरिका में बतौर वैज्ञानिक तैनात हैं। उन्होंने भी अपनी पत्नी की उपलब्धि पर खुशी प्रकट की है। मनीषा जोशी ने कहा कि आज वे जो भी हैं, उनके माता-पिता की वजह से हैं। बचपन से ही पढ़ाई को लेकर उनके माता-पिता ने उनको काफी प्रोत्साहित किया। इस वजह से आज उनको अपने माता-पिता की तपस्या का फल मिला है।

पिथौरागढ़ जिले से अपनी इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पंतनगर यूनिवर्सिटी से भौतिकी में बीएससी और एमएससी किया और इसके बाद उन्होंने बैंगलोर के विज्ञान के टॉप इंस्टिट्यूट आईआईएससी से भौतिक विज्ञान में पीएचडी की डिग्री हासिल की और उसके बाद वह अपने आगे की पढ़ाई और रिसर्च के काम के लिए स्विट्जरलैंड चली गईं और उन्होंने स्विट्जरलैंड की विख्यात यूनिवर्सिटी वासेल और कनाडा की वाटरलू यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई और रिसर्च पूरी की जिसके बाद अपनी कई वर्षों की मेहनत का उनको आखिरकार फल मिला और वे आईआईटी दिल्ली में भौतिक विज्ञान की असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयनित हो गई हैं।

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