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Wednesday, January 20, 2021
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उत्तराखंड: पर्वतीय समाज की हाउसिंग काॅलोनियां कही जाने वाली बाखली, एकजुटता और सहयोग की भावना को परिलक्षित करती है, जानिए कैसे

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पहाड़ो की लोक परंपराएं व रहन-सहन प्रकृति के करीब और सृष्टि से संतुलन बनाने वाली रही है। इसकी झलक पर्वतीय समाज की हाउसिंग काॅलोनियां कही जाने वाली बाखली में देखी जा सकती है। दर्जनों परिवारों को एक साथ रहने के लिए पहाड़ में बनने वाले ये भवन सामूहिक रहन-सहन, एकजुटता और सहयोग की भावना को परिलक्षित करते हैं। इनकी बनावट ऐसी होती थी कि आपदा के समय में एक साथ होकर चुनौतियां का सामना कर सकें। बताया जाता है कि कत्यूर व चंद राजाओं ने भवनों के निर्माण की इस शैली को विकसित किया था। लेकिन अंधाधुंध विकास, गांवों की उपेक्षा और भौगोलिक परिस्थतियों ने बहुत कुछ बदल दिया।

कैसे होती है संरचना

हर परिवार को मिलने वाला मकान की संरचना एक जैसी होती थी। निचले हिस्से मवेशियों के लिए जबकि आगे का हिस्सा चारे के भंडारण के लिए उपयोग में लाया जाता है। कुमाटी की बाखली में पूरी संरचना में तीन सौ फीट की लंबी छत है। सभी घरों को समान रूप से डिज़ाइन किया गया है। जिसमें एक परिवार के लिए रसोई और एक बेडरूम और तहखाने हैं। ‘बाखली‘ को इस तरह से डिजाइन किया था ताकि पूरा समुदाय संकट के समय एक साथ हो सके।

सबसे बड़ी बाखली

उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल की सबसे बड़ी बाखली नैनीताल जिले के रामगढ़ ब्लॉक के कुमाटी गांव में है। पारंपरिक रूप से मिट्टी और पत्थरों से बने इन घरों को दूर से देखने पर रेलगाड़ी का प्रतिबिंब बनता है। खूबसूरत खिड़की-दरवाजे और नक्काशी वाले इन मकानों को देखने से पहाड़ के समाज और सामूहिकता को समझा जा सकता है। करीब तीन सौ फीट लंबी छत वाली इस बाखली को पारंपरिक सामुदायिक घर भी कहा जाता है। यहां अब 10-12 परिवार ही रहते हैं। क्वारब से करीब 12 किमी दूर कुमाटी में अधिकांश जोशी के साथ भट्ट परिवार भी रहते हैं। इस बाखली में 25 समान घर हैं। कभी यहां एक साथ 125 से अधिक लोग रहते थे।

कुमाटी-कफुड़ा ग्राम पंचायत की प्रधान रीना आर्य, सामाजिक कार्यकर्ता प्रमोद कुमार ने बताया कि बाखली में वर्तमान में करीब 15 परिवार रहते हैं। कुमाटी की इसी बाखली में रह रहे आनंद बल्लभ जोशी के अनुसार बाखली करीब दो सौ साल पुरानी हैं । इसमें 27 घर हैं। फिलहाल इसमें दस परिवार रह रहे हैं। तोरणद्वार में पशु पक्षी, सर्प-सर्पनी, योग-योगिनि, श्रीगणेश, सिंह, फूल पत्तियों के डिजाइन होते हैं।

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