34.3 C
Dehradun
Tuesday, April 20, 2021
Homeउत्तराखंडरूद्रप्रयाग : सरकारी योजनाओं के भरोसे बैठने के बजाय बुढ़ना गांव के...

रूद्रप्रयाग : सरकारी योजनाओं के भरोसे बैठने के बजाय बुढ़ना गांव के दो प्रवासी युवाओं ने स्वयं शुरू किया चप्पल बनाने का व्यवसाय

- Advertisement -
- Advertisement -

कोविड 19 के चलते बाहरी राज्यों में रोजगार कर रहे प्रवासियों को वापस घर लौटे लगभग सात महीने का समय गुजर चुका है। और अब प्रवासी सरकारी योजनाओं के भरोसे बैठ नही बल्कि स्वयं अपने संशाधनों से स्वरोजगार की राह पर चल निकले हैं, जखोली के दो युवाओं ने भी स्वरोजगार की राह पकड़ी और अब उनका छोटा सा व्यवसाय अन्य प्रवासियोें के लिए प्ररेणास्रोत बन रहा है।

जहां ज्यादातर प्रवासी स्वरोजगार के रूप में होटल, दुकान या फिर कृषि, पशुपालन या सब्जी उत्पादन को महत्व दे रहे हैं, और ज्यादातार सरकारी योजनाओं में भी इस तरह के पारम्परिक व्यवसायों को ही प्राथमिकता दी जाती हैं, वही जखोली विकासखण्ड के बुढना गांव के दो युवाओं रुपेश सिंह गहरवार व प्रवीन्द्र राणा ने स्वरोजगार के लिए अलग ही व्यवसाय चुना, ये दोनों युवा इससे पूर्व बाहरी राज्यों में नौकरी करते थे व लाकडाउन के चलते गांव में बेरोजगार बैठे थे।

चप्पल बनाने के लिए लगा डाली मशीनें

बुढ़ना गांव के रुपेश सिंह गहरवार व प्रवीन्द्र राणा फतेड़ू बाजार में चप्पल बनाने वाली मशीनें लगा डाली। शुरूआती दिनों में लोगों को उनके चप्पल बनाने का व्यवसाय कुछ अटपटा सा लगा, लेकिन अब हर कोई उनके आईडिया को दाद दे रहा है, इनका कहना है कि इन मशीनों को लगाने से उनका लगभग तीन लाख रुपये खर्च हुए हैं। बीते माह अगस्त से अपने छोटे से कारखाने में चप्पल बनाने का काम शुरू भी कर दिया, वैसे अबतक पहाड़ के लोग चप्पलों के लिए तो मैदानी बाजारों पर ही निर्भर हैं, लेकिन अब धीरे धीरे समय बदल रहा है, और पहाड़ के युवाओं की सोच भी, ऐसे में वो दिन दूर नही जब स्थानीय मांग के अनुरूप पहाड़ में ही पूरा माल तैयार होने लगेगा।

बढोतरी होने पर देगें अन्य बेरोजगार युवाओं को रोजगार

व्यवसायी रुपेश सिंह का कहना है कि शूरुआती दौर में वे इस हाइड्रोलिक मेन्यूअल मशीन से लगभग प्रतिदिन दो सौ चप्पलें तैयार करते हैं और उनको उचित कीमत पर बेचते हैं। उनका कहना है कि जैसे ही धीरे धीरे प्रोडक्शन में बढोतरी होगी वैसे ही अन्य बेरोजगार युवाओं को भी वे रोजगार देगें ताकि वो भी अपने परिवार का पालन पोषण कर सकें। यही नहीं रूपेश सिंह और प्रवीन्द्र सिंह का कहना है कि जैसे ही धीरे धीरे काम में बढ़ोतरी कर बाहर के बाजारों में चप्पलों की सप्लाई की जायेगी वैसे वैसे स्थानीय युवाओं को भी इस कारोबार से जोड़ने की कोशिश की जायेगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments