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Monday, June 14, 2021
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आज देशभर में मनाया जा है रामनवमी का त्योहार, आज चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन की जाती है मां सिद्धिदात्री की पूजा

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आज रामनवमी का त्यौहार है। जो चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी मनाया जाता हैै। हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन मर्यादा-पुरूषोत्तम भगवान श्री राम जी का जन्म हुआ था। हिन्दू मतानुसार इसी दिन भगवान विष्णु के 7वें मानवरूपी अवतार श्रीराम का जन्म हुआ था। यह त्योहार हिंदूओं में बेहद ही महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है।

जाने रामनवमी के महत्व को-

रामनवमी का त्योहार पूरे पारंपरिक ढंग से मनाया जाता है। भगवान राम के भक्त रामायण का पाठ करते हैं। मंदिरों को सजाया जाता है, घर में भजन कीर्तन किया जाता है और रामरक्षा स्त्रोत भी पढ़ते हैं। भगवान राम की मूर्ति को फूल-माला से सजाते हैं और स्थापित करते हैं। भगवान राम की मूर्ति को पालने में झुलाते हैं। जगह-जगह भंडारे का आयोजन किया जाता है। भक्त प्रसाद में पंचामृत, श्री खंड, खीर या हलवा के भोग के बाद लोगों में वितरित करते हैं। रामनवमी के दिन ही चैत्र नवरात्र की समाप्ति भी हो जाती है।

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान श्रीराम अयोध्या के नरेश दशरथ के सबसे बड़े पुत्र थे। रामनवमी की कहानी लंकापति रावण से शुरू होती है। त्रेता युग में रावण का प्रकोप पूरे धरती पर था। उसके अत्याचारों से चारों ओर त्राहि-त्राहि मचा था। रावण इतना अत्याचार इसलिए बना था कि उसे अमरत्व का वरदान था। यानी उसे कोई मार नहीं सकता था। उसके अत्याचार से तंग होकर देवतागण भगवान विष्णु के पास गए और प्रार्थना करने लगे। फलस्वरूप प्रतापी राजा दशरथ की पत्नी कौशल्या की कोख से भगवान विष्णु ने राम के रूप में रावण को परास्त करने हेतु जन्म लिया। तब से चैत्र की नवमी तिथि को रामनवमी के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई। ऐसा भी कहा जाता है कि नवमी के दिन ही स्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस की रचना शुरू की थी।

आज चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री दुर्गा माता का अंतिम अवतार मानी जाती हैं। मां सिद्धिदात्री ने असुरों के अत्याचार से पृथ्वी को मुक्त कराने के लिए अवतार लिया था। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, मां सिद्धिदात्री आठ सिद्धियों से परिपूर्ण हैं। शास्त्रों में इन्हें कष्ट, रोग, शोक और भय से भी मुक्ति दिलाने वाली देवी माना गया है।

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