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Wednesday, April 21, 2021
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आज भारत के राष्ट्रीय गीत बंदे मातरम् के रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की पुण्यतिथि, जाने उनकी रचनाएँ

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भारत के राष्ट्रीय गीत बंदे मातरम् के रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की आज पुण्यतिथि है। उनका निधन 8 अप्रैल, 1894 को हुआ था।बंकिमचंद्र ने अपने उपन्यासों के माध्यम से देशवासियों में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ विद्रोह की चेतना का निर्माण करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। बंकिमचंद्र चटर्जी का जन्म 27 जून 1838 में हुआ था, उनकी मृत्यु 8 अप्रैल 1984 को हुई थी। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय बंगाली के प्रख्यात उपन्यासकार, कवि, गद्यकार और पत्रकार थे। उनका जन्म उत्तरी चौबीस परगना के कंठालपाड़ा, नैहाटी में एक परंपरागत और समृद्ध बंगाली परिवार में हुआ था।  मेदिनीपुर में अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद बंकिम चंद्र चटर्जी ने हुगली के मोहसीन कॉलेज में दाखिला लिया। किताबों के प्रति बंकिम चंद्र चटर्जी की रुचि बचपन से ही थी। वह शुरुआत में आंग्ल भाषा की ओर भी आकृष्ट थे, पर कहते हैं कि अंग्रेजी के प्रति उनकी रुचि तब समाप्त हो गई, जब उनके अंग्रेजी अध्यापक ने उन्हें बुरी तरह से डांटा था। इसी के बाद से उन्हें अपनी मातृभाषा के प्रति लगाव उपजा। वह एक मेधावी व मेहनती छात्र थे पर पढ़ाई के साथसाथ उनकी रुचि खेलकूद में थी।बंकिमचंद्र ने जब इस गीत की रचना की तब भारत पर ब्रिटिश शासकों का दबदबा था। ब्रिटेन का एक गीत था ‘गॉड! सेव द क्वीन’। भारत के हर समारोह में इस गीत को अनिवार्य कर दिया गया। बंकिमचंद्र तब सरकारी नौकरी में थे। अंग्रेजों के बर्ताव से बंकिम को बहुत बुरा लगा और उन्होंने साल 1876 में एक गीत की रचना की और उसका शीर्षक दिया ‘वन्दे मातरम्’। उनके द्वारा रचित उपन्यासों में ‘दुर्गेशनंदिनी’, ‘आनंदमठ’, ‘कपालकुंडला’, ‘मृणालिनी’, ‘राजसिंह’, ‘विषवृक्ष’, ‘कृष्णकांत का वसीयतनामा’, ‘सीताराम’, ‘राधारानी’, ‘रजनी’ और‘इंदिरा’ प्रमुख हैं।

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