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Thursday, October 22, 2020
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‘हमारे देश में नाइक के लिए कोई जगह नहीं है’ Mahathir ने बताया भारत के डर से जाकिर को कोई शरण नहीं देना चाहता

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जब से महातिर मुहम्मद को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया गया है, तब से उन्हें गज़ब का आत्मबोध हुआ है। अब वे न केवल अपनी भूल को स्वीकार भी रहे हैं, अपितु भारत के प्रभाव को भी स्पष्ट रूप से रेखांकित कर रहे हैं। हाल ही में WION को दिये एक विशेष साक्षात्कार में महातिर ने इस बात पर भी प्रकाश डाला है कि आखिर क्यों वे ज़ाकिर नाइक जैसे आतंकी प्रशिक्षक को भारत को नहीं सौंपना चाहते थे।

महातिर के अनुसार, “भारत में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच का संबंध अच्छा नहीं है। यहाँ पर बहुत ऐसे मामले हुए हैं जहां लोगों को धर्म के आधार पर मारा गया है। मेरे मायने में ज़ाकिर को भारत में बहुत खतरा है, इसलिए उसका भारत को सौंपा जाना मुनासिब नहीं”, परंतु जनाब वहीं पर नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा, “हमें लगा कि जब तक ऐसी कोई जगह नहीं मिल जाती जहां वह महफूज रहे, तब तक वो [ज़ाकिर] यहाँ [मलेशिया] रह सकता है। परंतु ये उसका दुर्भाग्य है कि अधिकांश देश उसे अपने यहाँ रखने को तैयार नहीं है।“

बता दें कि ज़ाकिर नाइक पर भारत के विरुद्ध आतंकी हमलों को बढ़ावा देने, भारत में धर्मांधता भड़काने और 26/11 एवं 2020 के पूर्वोत्तर दिल्ली के दंगों को भड़काने में अहम भूमिका निभाने का आरोप भी लगा है। जब पुलिस का ज़ाकिर नाइक पर शिकंजा कसने लगा, तो ज़ाकिर ने 2016 में भारत से भागकर मलेशिया में शरण लेना उचित समझा। अब महातिर के खुलासे से ये भी स्पष्ट हुआ है कि अब भारत का कूटनीतिक कद कहीं ज़्यादा ऊंचा है  और इसी के कारण कोई भी देश अब ज़ाकिर नाइक जैसे अपराधी को अपने यहाँ शरण देने से पहले दस बार सोचेगा।

सच कहें तो महातिर के सत्ता से बाहर होने के तीन प्रमुख कारण थे – एक तो कश्मीर के मुद्दे पर भारत विरोधी बयान देकर मलेशिया के संबंध भारत से खराब करना, दूसरा अपने हठधर्मिता के कारण मलेशिया की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना और तीसरा जाकिर नाइक को अपना अप्रत्यक्ष समर्थन देना। शायद ये ज़ाकिर नाइक के प्रभाव का ही कारण था कि महातिर ने सीएए का विरोध करते हुए मलेशिया की सनातन संस्कृति का भी अपमान किया, जिसके कारण स्वयं मलेशिया की जनता भी महातिर के विरोध में उतर आई।

अब चूंकि महातिर सत्ता से बाहर हो चुके हैं और उनके सत्ता वापसी की संभावनाएँ लगभग असंभव है, इसीलिए शायद वे अपने मन से अपना बोझ हल्का करने में लगे हुए हैं। इससे पहले उन्होंने इस बात को भी स्वीकारा था कि कश्मीर पर उनके बड़बोलेपन के कारण भारत और मलेशिया के बीच के संबंध काफी खराब हुए थे। WION की संवाददाता पाल्की शर्मा उपाध्याय के साथ विशेष बातचीत में महातिर ने कई बातें साझा की।

जब उनसे पूछा गया कि क्या पाकिस्तान का समर्थन करने के पीछे भारत और मलेशिया के संबंध खराब हुए, तो उन्होंने स्पष्ट बताया, “बिलकुल नहीं। मुझे लगता है कश्मीर पर मैंने जो बयान दिये थे, उसके कारण स्थिति बिगड़ी थी।“ इसके अलावा महातिर ने WION से अपनी बातचीत में ये भी बताया कि कैसे दुनियाको पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत को बेहतर ढंग से समझना चाहिए। महातिर के अनुसार, “अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उन्होने बेहतरीन काम किया पर हमें उनके नेतृत्व में भारत को बेहतर ढंग से समझना होगा, क्योंकि वे अन्य प्रधानमंत्रियों जैसे बिलकुल नहीं है”।

सच कहें तो महातिर मुहम्मद ने न केवल अपनी भूल स्वीकार की हैं, अपितु अपने बयानों से ये भी सिद्ध किया है कि भारत का वैश्विक कद अब पहले से कहीं अधिक मजबूत बन चुका है और भारत को हल्के में लेना उनकी बहुत भारी भूल थी, जिसका खामियाजा महातिर मुहम्मद पहले ही भुगत चुके हैं, और शायद अगली बारी तुर्की और नेपाल के बड़बोले राष्ट्राध्यक्षों की है।

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