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Wednesday, June 16, 2021
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नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले साल ‘आत्मनिर्भर भारत’ का नारा किया था बुलंद, आज नियम बदलकर ली जा रही है मदद

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आज भारत में आत्मनिर्भर बनने के लिए नारा लगाया जा रहा है। जिसमें बहुत से लोग भारत की वस्तुओं का इस्तेमाल कर रहे हैं तो वही बहुत से लोग खुद से रोजगार शुरू कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। यह नारा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया। जिसे लोगों ने अपने जीवन में अमल में भी लाया। लेकिन अब कोरोना वायरस की दूसरी लहर की वजह से मोदी सरकार ने न सिर्फ मनमोहन सिंह सरकार के 16 साल पुराने नियम को बदला, बल्कि चीन समेत 40 से ज्यादा देशों से गिफ्ट, डोनेशन भी कबूल किए हैं।

वही मनमोहन सिंह की पाॅलिसी यही थी कि-

  • प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार 2004 से 2014 तक केंद्र में रही। दिसंबर 2004 में जब दक्षिण भारतीय तटीय इलाकों में सुनामी ने तबाही मचाई, तब मनमोहन सिंह ने विदेशी मदद की पेशकश यह कहते हुए ठुकरा दी थी कि हम अपने स्तर पर हालात से निपट सकते हैं। जरूरत पड़ेगी तो ही विदेशी सहायता लेंगे। खैर, उसके बाद कभी जरूरत पड़ी नहीं।
  • मनमोहन सिंह ने जो कहा, उस पर कायम भी रहे। 2005 के कश्मीर भूकंप, 2013 की उत्तराखंड की बाढ़ और 2014 की कश्मीर बाढ़ की राष्ट्रीय आपदाओं के समय भी मनमोहन सिंह ने न तो किसी और देश से राहत मांगी और न ही उनकी पेशकश को स्वीकार किया। और तो और, अगर कोई देश मदद की पेशकश करता तो उसे सम्मान के साथ मना कर दिया जाता।
  • भारत सरकार की हमेशा से पॉलिसी ऐसी ही रही है। इससे पहले उत्तरकाशी भूकंप (1991), लातूर भूकंप (1993), गुजरात भूकंप (2001), बंगाल तूफान (2002) और बिहार की बाढ़ (2004) में भारत ने विदेश से राहत कार्यों में मदद ली थी।
  • 2018 की केरल बाढ़ में राज्य सरकार ने कहा था कि 700 करोड़ रुपए की सहायता की पेशकश UAE ने की है। पर केंद्र की मोदी सरकार ने कहा कि इसकी जरूरत नहीं है। राज्य में जो भी राहत एवं पुनर्वास के काम होंगे, उसके लिए घरेलू स्तर पर ही पैसा जुटाया जाएगा। इस पर केंद्र व राज्य सरकारों में विवाद की स्थिति भी बनी थी।

वही अभी क्या बदला है?

मनमोहन सिंह का दिसंबर 2004 में दिया बयान पॉलिसी बना और उसके बाद कभी भी राष्ट्रीय आपदा के समय विदेशी सहायता नहीं ली गई। कोरोना की दूसरी लहर से निपटने में जरूर मोदी सरकार की विदेश पॉलिसी में तीन बड़े बदलाव हुए हैं।

1. चीन से ऑक्सीजन संंबंधी सामान और जीवनरक्षक दवाएं खरीदने में कोई वैचारिक समस्या नहीं है। पाकिस्तान से मदद ली जाए या नहीं, इस पर सरकार विचार कर रही है। कोई फैसला नहीं हुआ है। संभावना कम ही है कि मदद स्वीकार की जाएगी।
2. राज्य सरकार विदेशों से टेस्टिंग किट से लेकर दवाएं तक खरीद सकेंगी। साथ ही किसी भी तरह की मदद प्राप्त कर सकेंगी। इसमें केंद्र सरकार या उसकी कोई पॉलिसी आड़े नहीं आएगी। यह पॉलिसी लेवल पर एक बड़ा बदलाव है।
3. भारत सरकार ने विदेशों से गिफ्ट, डोनेशन और अन्य सहायता स्वीकार करना शुरू कर दिया है। यह एक बड़ा बदलाव है क्योंकि 2004 के बाद यह पहली बार हो रहा है।

वही अब भारत ने विदेशी मदद लेकर बहुत से राज्यों से वस्तुएँ ली है। जिसके बाद मोदी सरकार ने बहुत कुछ बदला है। इसी के साथ भारत ने चीन के साथ साथ 40 अन्य देशों से भी बहुत सी मदद ली है।

 

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