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Wednesday, April 21, 2021
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उत्तराखंड के प्रमुख ग़्लेशियर और हिमनद, आइये जाने इनके बारे में

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उत्तराखण्ड का अधिकांशतः भाग पहाड़ी है इसलिए मध्य हिमालय व शिवालिक श्रेणियों के द्वारा घिरने के कारण राज्य में बहुत से ग्लेशियर व हिमनद हैं। इन ग्लेशियर व हिमनदों के कारण यहाँ की नदियाँ और झीलों में सदा जल रहता है। वहीं ये पर्यटन की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है।

हिमनद या ग्लेशियर – हिमालय के ऊँचाई वाला क्षेत्र जहाँ हिमखंडों के खिसकने, गलने आदि प्रक्रियाएं होती हैं, उन्हें ग्लेशियर या हिमनद या हिमानिया कहते हैं। साधारण शब्दों में हिमालय का वह ऊँचाई वाला बर्फीला क्षेत्र जहाँ से निकलने वाली जल धाराएँ हिमालय नदियों का निर्माण करती हैं। हिमानिया या हिमनद कहलाती हैं।

“ग्लेशियर” शब्द का उद्भव फ्रेंच शब्द glace से हुआ है, जिसका अर्थ है बर्फ। ग्लेशियरों को “बर्फ की नदियाँ” भी कहा जाता है। ऊँचाई वाले क्षेत्रों में स्थित वह हिमखंड जिनमें गलने व खिसकने आदि क्रिया होती है, उन्हें हिमानी, हिमनद, बर्फ की नदियाँ व ग्लेशियर कहा जाता है। उत्तराखंड राज्य में मुख्यत: अल्पाइन प्रकार के ग्लेशियर पाए जाते है –

अल्पाइन ग्लेशियर का निर्माण पर्वतों पर होता हैं और उनमे से जल का प्रवाह घाटियों के माध्यम से नीचे की ओर होता हैं। कभी-कभी, अल्पाइन ग्लेशियर गंदगी, मिट्टी और अन्य सामग्रियों को अपने रास्ते से बाहर धकेल कर गहरी घाटियों का निर्माण करते हैं।

उत्तराखंड के प्रमुख ग़्लेशियर-

मिलम , काली,नामिक , हीरामणि, पिनौरा,रालम,पोटिंग- पिथौरागढ़
सुंदरढूंगा, सुखराम , पिंडारी , कफनी , मैकतोली- बागेश्वर
यमुनोत्री, गंगोत्री, डोरियानी , बंदरपूंछ-  उत्तरकाशी चौराबाड़ी, केदारनाथ-  रुद्रप्रयाग
दूनागिरी, हिपराबमक, बद्रीनाथ, संतोंपथ. भागीरथी-  चमोली
खतलिंग टिहरी

उत्तराखंड के प्रमुख हिमनद-

  • गंगोत्री हिमनद
  • पिंडारी हिमनद
  • मिलम हिमनद
  • सतोपंथ व भागीरथी हिमनद
  • खतलिंग हिमनद
  • चोराबाड़ी हिमनद
  • बंदरपूंछ हिमनद

गंगोत्री ग्लेशियर- (उत्तरकाशी)

  • यह उत्तराखंड का सबसे बड़ा हिमनद है जो की 30 किमी लम्बा तथा 2 किमी चौड़ा है
  • यह कई बड़े- छोटे हिमनदों से मिलकर बना है  जिनके नाम है – ( रतनवन , चतुरंगी , स्वच्छंद, कैलाश ) है
  • इसी हिमनद के गोमुख नामक स्थान से भागीरथी नदी निकलती है , जिसे  देवप्रयाग के बाद गंगा के नाम से जाना जाता है
  • वैज्ञानिको के अनुसार यह ग्लेशियर प्रतिवर्ष 22.23 मीटर पीछे खिसक रहा है

पिंडारी ग्लेशियर -(बागेश्वर+पिथौरागढ़+चमोली)

  • यह राज्य का दूसरा सबसे बड़ा हिमनद है जो 30 किमी लम्बा तथा 400 मीटर चौड़ा है
  • यह ग्लेशियर त्रिशूल , नंदा देवी, नंदा कोट  पर्वतो के मध्य में स्थित है
  • इस ग्लेशियर से पिंडर नदी का उद्गम होता है

मिलम ग्लेशियर- (पिथौरागढ़)

  • शुद्ध रूप से यह कुमाऊ का सबसे बड़ा ग्लेशियर है। जो 16 किमी लम्बा है।
  • इस ग्लेशियर से पिंडर नदी की सहायक मिलन नदी तथा काली नदी की सहायक गोरी गंगा नदी निकलती है

सतोपंथ व भागीरथी हिमनद- (चमोली)

  • सतोपंथ हिमनद की लम्बाई 13 किमी व भागीरथी हिमनद की लम्बाई 18 किमी है
  • इन दोनों ग्लेशियरों के मुख मिलकर अलकनंदा नदी का उद्गम बनाते है
  • ये दोनों हिमनद नीलकंठ पर्वत के पूर्वी भाग में आराम कुर्सी की भाँति नजर आते है इस  स्थल को अल्कापुरी कहा जाता है

खतलिंग हिमनद- (टिहरी + रुद्रप्रयाग)

  • इस ग्लेशियर के तीन हिमनद (काँठा, सतलिंग,दूध डोडा) मिल जाते है
  • खतलिंग  से  भिलंगना नदी का उद्गम होता है
  • केदारखंड में वर्णित स्फटिक शिवलिंग यही स्थित है यह विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग है

चोराबाड़ी हिमनद- (रुद्रप्रयाग)

  • इस ग्लेशियर से अलकनंदा की सहायक मन्दाकिनी नदी निकलती है
  • इस ग्लेशियर से निर्मित ताल को चौराबाड़ी ताल  या शरवदी ताल या गाँधी सरोवर कहा जाता है

बंदरपूंछ हिमनद-(उत्तरकाशी)

  • इस ग्लेशियर की लम्बाई 12 किमी है
  • यह ग्लेशियर उत्तरकाशी जिले के बंदरपूंछ पर्वत के उत्तरी ढाल में है

 

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