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Thursday, April 22, 2021
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भारत-चीन सीमा पर फिर बढ़ा तनाव, LAC पर 45 साल बाद चलीं गोलियां !

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LAC पर भारत और चीन के बीच का तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। चीनी सैनिकों की ओर से फिर घुसपैठ की कोशिश के चलते करीब चार दशक बाद सोमवार देर रात पहली बार दोनों तरफ से गोलीबारी की खबर है। हालांकि, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को चेतावनी देने के लिए ही गोली चलाई है। घटना के बाद हालात नियंत्रण में है। भारत की ओर से आधिकारिक तौर पर घटना को लेकर कोई बयान नहीं दिया गया है।

रणनीतिक तौर पर अहम माने जाने वाले काला टॉप और हेल्मेट टॉप सहित पेंगोंग इलाके के कई हिस्सों पर भारतीय सेना का कब्जा है। यही वजह है कि चीन की सेना बौखलाई हुई है। अपनी इसी बौखलाहट के चलते चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) सोमवार रात को सीमा पर आगे बढ़ने लगी। इस दौरान भारतीय सेना ने वार्निंग शॉट (चेतावनी के लिए हवा में फायरिंग) दागे। इसके बाद चीन के जवान पीछे हटे। कुछ देर बाद ही सीमा पर हालातों को नियंत्रित कर लिया गया था।

चीन ने भारतीय सेना पर गैर-कानूनी तरीके से एलएसी पार करने का लगाया आरोप

चीनी सैन्य प्रवक्ता ने इस बारे में जारी एक बयान में आरोप लगाया कि भारतीय सेना ने गैरकानूनी तरीके से एलएसी पार की और पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे और शेनपाओ पहाड़ी इलाके में घुस आए। ऑपरेशन के दौरान, भारतीय सेना ने चीनी बॉर्डर फोर्स को धमकी देने के अंदाज में फायरिंग की और चीनी सीमा रक्षकों को जवाबी कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसे बेहद गंभीर भड़काऊ कार्रवाई करार देते हुए चीन ने कहा, ‘हम भारतीय पक्ष से आग्रह करते हैं कि इस तरह की खतरनाक करवाई को तुरंत रोके।’

बता दें कि 1975 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब चीन और भारत की सीमा पर गोली चली हो। इससे पहले दोनों देशों के बीच गोली न चलाने और किसी की जान न गंवाने को लेकर समझौता किया गया था। हालांकि बीते 15 जून को भारत और चीन के जवानों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। जिसमें सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे। वहीं अब सोमवार को सीमा पर गोली चलने की घटना घटी है।

यह घटना ऐसे समय में हुई है, जबकि शुक्रवार को ही सीमा पर तनाव कम करने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीनी रक्षा मंत्री वेई फेंग के बीच मॉस्को में बातचीत हुई थी। 10 सितंबर को विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच मॉस्को में बातचीत होने वाली है। जयशंकर शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में शामिल होने रूस की राजधानी मॉस्को जाने वाले हैं। एक समाचार पत्र से बातचीत में जयशंकर ने दिन में कहा भी था कि एलएसी पर हालात बहुत गंभीर हैं।

 

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