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Wednesday, April 21, 2021
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उत्तराखंड का राज्य वृक्ष बुरांश, आइये जाने इसके उपयोग और फायदे क़्या होते हैं

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उत्तराखंड का राज्य वृक्ष है बुरांश। जिसकी अपनी एक खासियत है। बुरांश को बुरूंश भी कहा जाता हैै। नेपाल में इसे लाली गुराँस और गुराँस के नाम से जाना जाता है। दरम्याने आकार की मोटी गाढ़ी हरी पत्तियों वाले छोटे पेड़ पर सुर्ख लाल रंग के फूल खिला करते हैं। भारत के अलावा यह नेपाल, तिब्बत, भूटान, श्रीलंका, म्यांमार, पकिस्तान, अफगानिस्तान, थाईलैंड और यूरोप में भी पाया जाता है। बुरांश हिमालयी क्षेत्रों में 1500 से 4000 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाने वाला सदाबहार वृक्ष है। बुरांश के फूलों का रंग लाल होता है। 11000 मीटर की ऊंचाई पर सफ़ेद रंग के बुरांश पाए जाते है। बुरांश के वृक्षों की ऊंचाई 20 से 25 फीट तक होती हैं। यह एरिकेसिई परिवार की 300 प्रजातियों में से है। एरिकेसिई परिवार की प्रजातियाँ उत्तरी गोलार्ध की सभी ठंडी जगहों में पाई जाती हैं। यह नेपाल का राष्ट्रीय फूल है। भारत के उत्तराखण्ड, हिमाचल और नागालैंड राज्यों में इसे राज्य पुष्प का दर्जा दिया गया है। हिमालय में इसकी चार प्रजातियाँ मिलती हैं। दक्षिण भारत में भी इसकी एक प्रजाति रोडोडेंड्रॉन निलगिरिकम नीलगिरी की पहाड़ियों में पायी जाती है। प्रदेश में इसकी कई प्रजातियां पायी जाती है। इसका जूस औषधीय गुणों से भरपूर है। बुरांश 15 मार्च से लेकर 15 अप्रैल के मध्य तक खिलता हैै।

बुरांश के जूस के फायदे:

बुरांश का जूस हृदय संबंधी बीमारियों से बचाता है।  यह खून की कमी को दूर करता है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा करता है। इसी के साथ यह उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर में काफी लाभदायक होता है। यह लीवर संबंधी बीमारियों को दूर करता है। बुरांस एंटी ऑक्सीडेंट की पूर्ति भी करता है।

बुरांश का उपयोग:

(1) खाद के रूप में- बुरांश के वृक्ष की पत्तियाँ चौड़ी प्रकार की होती है जो सूखने के बाद खाद के रूप में प्रयोग में लाई जाती है।

(2) खाद्य पदार्थों के रूप में- बुरांश के फूल से जैम, जेली एवं जूस बनाया जाता है। इसका जूस अत्यंत ही लाभकारी एवं स्वादिष्ट होता है। इसकी पत्तियों से सब्जी भी बनाई जाती है।

(3) दवाई के रूप में- बुरांश की पत्तियों से लेप बनाया जाता है, जिससे सरदर्द दूर हो जाता है। माँसपेसियो के दर्द के लिए भी ये अत्यंत लाभकारी है। स्वास की बीमारियों के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है। सफ़ेद बुरांश दिल और पेट की बीमारियों के लिए रामबाण मन जाता है। सफ़ेद बुरांश में अत्यंत औषधीय एवं लाभकारी गुण होते है।

(4) अन्य उपयोग- बुरांश की लकड़ी का प्रयोग चारकोल एवं ईंधन बनाने में किया जाता है। बुरांश मात्र इतने ही क्षेत्रों में उपयोगी नहीं है बल्कि लघु एवं कुटीर उद्योगों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लोग बुरांश के फूल से निर्मितं जैम, जेली एवं जूस का लघु उद्योग लगाकर व्यापार करते है। जिससे हिमालयी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उत्पन्न होते है जो राज्य की प्रगति एवं विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।

 

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