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Monday, October 26, 2020
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सौरव गांगुली ने किया अपने सबसे बुरे दौर का खुलासा, हर शख्स मुझे कप्तानी से हटाने में शामिल था

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भारतीय पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को क्रिकेट को अलविदा कहे कई साल हो गए हैं, लेकिन अब जाकर उन्होंने अपने सबसे मुश्किल दौर का खुलास किया है! सौरव ने कहा कि उनके करियर का सबसे बुरा समय वह था, जब उन्हें साल 2005 में भारतीय कप्तान पद से हटाया और उसके बाद टीम से भी हटा दिया.

सौरव ने एक समाचार पत्र से बातचीत में पूरी तरह से ‘अन्यायपूर्ण’ करार दिया.  सौरव ने कहा कि यह मेरे करियर का सबसे बड़ा झटका था और यह पूरी तरह से अन्याय था. मैं जानता हूं कि आपको हर समय न्याय नहीं मिल सकता लेकिन तब भी ऐसे बर्ताव से बचा जा सकता था. मैं उस टीम का कप्तान था, जिसने जिंबाब्वे में जीत दर्ज की थी, लेकिन भारत वापस लौटने के बाद मुझे टीम से हटा दिया गया.

पूर्व कप्तान ने कहा कि मेरा साल 2007 में वर्ल्ड कप जीतने का सपना था क्योंकि पिछली बार हम फाइनल में हारे थे. वर्ल्ड कप जीतने का सपना होने के पीछे मेरे पास कारण थे. पूर्व कप्तान ने कहा कि उनके नेतृत्व में पिछले पांच साल में टीम ने बहुत ही शानदार प्रदर्शन किया था. फिर चाहे यह भारत की जमीन हो या विदेशी, लेकिन तभी अचानक से ही मुझे टीम से हटा गिया गया. पहले आपने कहा कि मैं वनडे टीम में नहीं हूं और उसके बाद टेस्ट टीम से भी मुझे बाहर कर दिया गया. सौरव ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि यह तब हुआ जब तत्कालीन मुख्य कोच ग्रेग चैपल ने उनके खिलाफ ई-मेल लिखा, जो लीक हो गया था.

सौरव ने कहा कि मैं केवल चैपल को ही दोष नहीं दूंगा, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि यह चैपल ही थे, जिन्होंने शुरुआत की. चैपल ने अचानक से ही मेरे खिलाफ बीसीसीआई को ई-मेल भेजा, जो लीक हो गया. क्या इस तरह की बातें होती हैं? एक क्रिकेट टीम परिवार की तरह होता है. सलाह में भिन्नता और परिवार के बीच असहमति भी होती है, लेकिन इसका हल बातचीत से निकाला जाना चाहिए. आप कोच हैं और मानते हैं कि मुझे एक तय नंबर पर खेलना चाहिए, तो आपको मुझ से यह कहना चाहिए. जब मैं बतौर खिलाड़ी वापस लौटा, तो उन्होंने ठीक वही बातें मुझसे कीं. सवाल यह है कि आपने पहले ऐसे क्यों नहीं किया?

हालांकि, गांगुली ने अकेले चैपल को ही दोष देने से इनकार करते हुए कहा है कि पूरी व्यवस्था के समर्थन के बिना भारतीय कप्तान को हटाना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि अन्य लोग भी मासूम नहीं हैं. एक विदेशी कोच जिसका चयन से कुछ लेना-देना नहीं होता, वह भारतीय कप्तान को नहीं हटा सकता.

मैं समझ चुका था कि यह व्यवस्था के समर्थन के बिना संभव नहीं था. मुझे हटाने की योजना में हर शख्स शामिल था, लेकिन मैं दबाव में टूटा नहीं. मैंने खुद में भरोसा नहीं खोया. साल 2005 में टीम से हटाए जाने के बाद सौरव करीब एक साल बाद भारतीय टीम में लौटे और यहां से लगभग दो और साल उन्होंने भारतीय टीम की सेवा की.

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