केदारनाथ आपदा के सात वर्षों बाद भी मंदिर को अपनी 66 नाली भूमि पर कब्ज़ा नहीं मिल पाया

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Kedarnath-Vidhayak- Manoj Rawat

केदारनाथ को आपदा के सात वर्ष बाद भी अपनी 66 नाली भूमि पर कब्जा नहीं मिल पाया है। पुननिर्माण के दौर से गुजर रही केदारपुरी में शासन, प्रशासन मंदिर की भूमि का सीमांकन नहीं कर पाया है। देवस्थानम बोर्ड द्वारा भी इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

वही इस संबंध में विधायक केदारनाथ मनोज रावत द्वारा मुख्यमंत्री को पत्र भी भेजा गया है। मनोज रावत का कहना है की 66 नाली भूमि का शासन / प्रशासन द्वारा सीमांकन कर कब्जा नहीं दिया गया है। मंदिर से जुड़े जरुरी भवनों व मंदिरों का निर्माण भी नहीं हुआ है, जो गंभीर उदासीनता है। सरकार को मंदिर की भूमि का सीमांकन कर उसे तत्काल वापस करना चाहिए।

साथ ही सरकार पर तंज कसते हुए मनोज रावत ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा-“हमारे बाबा जी की जमीन तो वापस कर दो सरकार , बाबा बिना भोग मंडी के हैं। पुजारी और कर्मचारी बिना घर के बाबा की सेवा कर रहे हैं। बाकी काम दान-दाता कर लेंगे।”

66 नाली इस भूमि में 21 नाली खाता- खतौनी संख्या आठ में संकमणीय अधिकार के तहत दर्ज है। जबकि 45 नाली भूमि नजूल /लीज ग्रांट की गई है, लेकिन 2013 की आपदा में केदारपुरी में व्यापक तबाही हुई थी , जिससे यहां का भूगोल भी बदल गया था। मंदिर समेत तीर्थ पुरोहितों और हक – हकूकधारियों की सैंकड़ों नाली भूमि व भवन सैलाब की भेंट चढ़ गए थे , लेकिन सात वर्ष बाद भी केदारनाथ मंदिर के नाम दर्ज 66 नाली भूमि का सीमांकन कर कब्जा नहीं किया गया। बीकेटीसी / देवस्थानम बोर्ड द्वारा भी इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई है। भूमि का सीमांकन नहीं होने से आज भी केदारनाथ में भोग मंडी, पुजारी आवास , कर्मचारी आवास आदि का निर्माण नहीं हो पाया है। आपदा के बाद मंदाकिनी व सरस्वती नदी के बीच केदारनाथ में लगभग सात सौ नाली भूमि सुरक्षित बची है। ऐसे में मास्टर प्लान के तहत होने वाले पुननिर्माण कार्यों को पर्याप्त भूमि जुटाना भी प्रशासन के लिए चनौती से कम नहीं है।

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