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Monday, March 8, 2021
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बसंत पंचमी में 153 वर्ष बाद बन रहा है पंचमहायोग का संयोग, जानें इससे जुड़ी धार्मिक कथा

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आज बसंत पंचमी का त्यौहार है। इस बार वसंत पंचमी का पर्व कई मायनों में काफी शुभ मानी जा रही है। इस बार शुभ योग, रवि योग, कुमार योग, अमृत सिद्ध योग और सर्वाथ सिद्ध योग वसंत पंचमी पर बन रहे हैं। पंचमहायोग का ये संयोग करीब 153 वर्ष बाद पड़ रहा है। इस बार वसंत पंचमी का स्नान-व्रत पर्व 16 फरवरी यानि आज पड़ रहा है। वसंत पंचमी पर इस बार मंगलवार, सर्वार्थ व अमृत सिद्धि का अत्यंत शुभकारी योग है। इसके चलते अबूझ मुहूर्त में विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत संस्कार, नए प्रतिष्ठान का शुभारंभ, खरीदारी आदि श्रेष्ठ रहने वाला है। वसंत पंचमी को पीले वस्त्र धारण किए जाते हैं। इससे सकारात्मक शक्ति प्राप्त होती है। वसंत पंचमी के पूजन में माता सरस्वती को सफेद वस्त्र धारण कराकर स्थापित किया जाता है। सबसे पहले गणेश-पूजन कर माता सरस्वती का पंचोपचार विधि से अर्चन किया जाता है। इस दिन केवल घरों में ही नहीं, शिक्षण संस्थानों में भी मां सरस्वती की पूजा आयोजित की जाती है।

जानें क्या है धार्मिक कथा-

पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा ने जब संसार को बनाया तो पेड़-पौधों और जीव जन्तुओं सबकुछ दिख रहा था, लेकिन उन्हें किसी चीज की कमी महसूस हो रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का तो सुंदर स्त्री के रूप में एक देवी प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक थी। तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। यह देवी थीं मां सरस्वती। मां सरस्वती ने जब वीणा बजाया तो संस्सार की हर चीज में स्वर आ गया। इसी से उनका नाम पड़ा देवी सरस्वती। यह दिन था बसंत पंचमी का। तब से देव लोक और मृत्युलोक में मां सरस्वती की पूजा होने लगी।

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