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Thursday, January 21, 2021
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लिपुलेख रोड बनने से चिड़ा नेपाल ! देहरादून-नैनीताल समेत इन राज्य के शहरों को बता रहा अपना शहर

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नेपाली सत्ताधारी दल भारत और नेपाल के संबंधों में दूरी बढ़ाने के लिए लगातार दुष्प्रचार कर रहा है। लिपुलेख रोड बनने से चिड़े नेपाल ने पहले भारत के तीन इलाकों को अपना शहर बताया था, वहीं अब वो उत्तराखंड के देहरादून, नैनीताल के साथ-साथ यूपी, बिहार, सिक्किम और हिमाचल प्रदेश के कई शहरों को भी अपना बता रहा है। नेपाल की तरफ से भारत के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है।

इस अभियान की सिरमौर नेपाल की सत्ताधारी पार्टी यानी नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी है। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी यूनीफाइड नेपाल नेशनल फ्रंट के साथ मिलकर ग्रेटर नेपाल अभियान चला रही है। इसके तहत नेपाल के लोग भारत के कई प्रमुख शहरों को अपना बता रहे हैं। नेपाल में चीन के इशारे पर विवादित अभियान चल रहा है। अभियान के तहत नेपाल के लोग भारतीय शहरों को अपना बताने के लिए 1816 में हुई सिगौली संधि से पहले के नेपाल की तस्वीर दिखा रहे हैं। इसके जरिए नेपाल सरकार अपने देश के लोगों को भ्रमित करने में लगी है।

चीन के बाद अब नेपाल भी भारत के लिए मुसीबतें पैदा कर रहा है। चीन के इशारे पर काम करने वाले नेपाल के प्रधानमंत्री पर चीन से करोड़ों की रिश्वत लेने का आरोप भी लगा है। ग्रेटर नेपाल अभियान के जरिए भारत की छवि खराब की जा रही है। नेपाली युवा बड़ी संख्या में इस अभियान से जुड़ रहे हैं। इसके लिए बकायदा ग्रेटर नेपाल के नाम से फेसबुक पेज बनाया गया है। ग्रेटर नेपाल अभियान के जरिए ट्विटर और यूट्यूब पर भारत के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के युवा भी इन पेजों पर भारत के खिलाफ खूब जहर उगल रहे हैं।

लिपुलेख दर्रे तक रोड बनने से चिढ़े नेपाल ने पहले भारत के कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को अपना इलाका बताया था। नेपाल कि इन हरकतों के चलते भारत-नेपाल के संबंधों में तनाव बना हुआ है। उत्तराखंड से नेपाल की 275 किलोमीटर लंबी सीमा लगी है। जहां नेपाल लगातार सशस्त्र बलों की तैनाती भी कर रहा है।

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