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Sunday, October 25, 2020
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नैनीताल: देश के खूबसूरत पर्यटन स्थल पर हो रहा भूस्खलन चौतरफा संकट का संकेत ? जानिए क्या होंगे भविष्य में परिणाम

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भूगर्भीय दृष्टि से संवेदनशील सरोवर नगरी में बलियानाला, चाइनापीक, मालरोड, कैलाखान, टिफिनटॉप क्षेत्रों में हो रहा भूस्खलन और भूधंसाव चौतरफा संकट का संकेत दे रहा है। भूवैज्ञानिक भी इसे शहर के अस्तित्व के लिए शुभसंकेत नहीं मान रहे। शहर के बीचोबीच से गुजरने वाले फॉल्ट का एक्टिव होना इसका कारण माना जा रहा है। जिसके परिणाम भविष्य में और भी भयावह हो सकते है।

माना जाता है कि 1867 में शहर में पहली भूस्खलन की घटना हुई थी। 18 सितंबर 1880 के भूस्खलन ने तो 151 जिंदगी ले ली साथ ही कई भवन जमीदोज हो गए। शहर के नीचे स्थित बलियानले में 150 से भी अधिक वर्षों से भूस्खलन आज भी जारी है। बीते वर्ष शहर की सबसे ऊंची चोटी चाइनापीक में एक बार फिर भारी भूस्खलन हुआ था। साथ ही पहाड़ी के एक बड़े हिस्से में करीब छह इंच चौड़ी दरार उभर आई।

भूगर्भ विज्ञान विभाग कुमाऊं विश्विद्यालय के प्रो बीएस कोटलियाने बताया कि ज्योलीकोट से कुंजखड़क तक एक बड़ी क्षेत्रीय भ्रश रेखा मौजूद है। जो कि बलियानले के समीप से नैनीझील के मध्य से होती हुई गुजरती है। जिसे नैनीताल फॉल्ट का नाम दिया गया है। यह फॉल्ट या दरार भूगर्भिय हलचलों का परिणाम है। भूगर्भीय हलचलों के कारण ही इस फॉल्ट के एक्टिव होने के संकेत मिल रहे है। इस दरार के सिकुड़ने या खुलने से ही भूस्खलन जैसी घटनाएं सामने आ रही है।

ईधर टिफिनटॉप में भी भूस्खलन होने लगा है। भूस्खलन और पहाड़ी में दरारे उभरने से ऐतिहासिक ब्रिटिशकालीन डोरोथी सीट का अस्तित्व भी खतरे में नजर आ रहा है। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के भूवैज्ञानिक प्रो बीएस कोटलिया का मानना है कि शहर और नैनीझील के बीच से गुजरने वाले फॉल्ट के एक्टिव होने से भूस्खलन और भूधसाव की घटनाएं सामने आ रही है। शहर में लगातार बढ़ता भवनों का दबाव और भूगर्भीय हलचल इसका कारण हो सकता है। उन्होंने चेताया है कि अभी भी शहरवासी नहीं संभले तो परिणाम भयावह हो सकते है।

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  1. […] माना जाता है कि 1867 में शहर में पहली भूस्खलन की घटना हुई थी। 18 सितंबर 1880 के भूस्खलन ने तो 151 जिंदगी लील ली साथ ही कई भवन जमीदोज हो गए। शहर के नीचे स्थित बलियानले में 150 से भी अधिक वर्षों से भूस्खलन आज भी जारी है। बीते वर्ष शहर की सबसे ऊंची चोटी चाइनापीक में एक बार फिर भारी भूस्खलन हुआ था। साथ ही पहाड़ी के एक बड़े हिस्से में करीब छह इंच चौड़ी दरार उभर आई। Read More […]

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