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Monday, October 26, 2020
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आपदा की घड़ी में अपने कार्यशैली को बखूभी निभा रहे केदारनाथ विधायक मनोज रावत, जानिए इनका “आपदा सफरनामा”

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कोरोना के बढ़ते संक्रमण के वजह से सभी डरे हुए हैं। दुनिया भर में इस वायरस के वजह से तबाही मची हुई है। इससे एक बात तो साफ़ पता चलती है की मुश्किल घडी में कब किसी की प्राथमिकता बदल जाये ये कुछ कह नहीं सकते। जो लोग रोजी-रोटी की जुगत में दूसरे शहरों में रह रहे थे आज वो लोग इस आपात स्थिति में अपने शहर,अपने घर लौटने की जुगत में लगे हुए हैं। पहले प्राथमिकता थी किसी भी हाल में दो वक़्त की रोटी के लिए नौकरी करना, अब प्राथमिकता है किसी भी हाल में अपने घर पहुंचना। अब ऐसे में जिसको जिसकी जैसे भी जो मदद मिल जाये वो उसके लिए फ़रिश्ते से कम नहीं हैं। ऐसे ही फ़रिश्ते के रूप में सामने आये हैं उत्तराखंड के केदारनाथ विधानसभा के विधायक मनोज रावत।

इस संकट के घडी में मनोज रावत जनता के वो प्रतिनिधि हैं जो हर संकट में अपनी जनता का ख्याल रखते हैं। इसके साथ ही लोग उनकी वाहवाही करने से भी कभी नहीं चूकते। सेकण्डों प्रवासियों को अपने प्रदेश में वापसी के लिए तमाम कदम उठाए चाहे दूसरे प्रदेशों में फँसें लोगों को घर वापसी के लिए गाड़ी, बसें, राशन प्रदान करना हो या बाहरी प्रदेशों से घर लोटे लोगों के लिए क्वॉरंटीन सेंटर में रहने खाने की उचित व्यवस्था के साथ उनको स्वरोज़गार के लिए प्रतीत करना हो। नागपुर और दशजुल्या क्षेत्र तथा गुप्तकाशी के आसपास से जुड़े क्षेत्र त्रिजुगीनारायण और गौरीकुंड क्षेत्र जहां की क्वॉरंटीन सेंटर बनवाया गया और इसके साथ ही वहां खाना खाने पीने से लेकर सैनिटाइजर तक हर चीज की व्यवस्था की गयी, वह आस-पास के सभी क्वॉरंटीन सेंटर का उन्होंने स्वयं निरीक्षण किया है।

आपको बता दें की अभी हल ही में एक आरुषि नाम की बच्ची है, जिसके पूरे शरीर और फेफड़ों मै पानी भर गया था, किडनी भी खराब हों गयी थी, साँस लेने में तकलीफ थी जल्द से जल्द वेंटिलेटर पर रखना आवश्यक था। डॉक्टर्स के मुताबिक यदि इलाज जल्द ना किया गया तो बच्ची का जीवन संकट में पड़ सकता था। इस बच्ची के पिता हरि सिंह जी जो ग्राम- बष्टी, विकासखंड – अगस्त्यमुनि (रुद्रप्रयाग) जो कि बेरोजगार ओर मजदूरी का काम कर के अपने बच्चों का पालन – पोषण करते है, जिनकी सात लड़कियां ओर एक लड़का है, परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत दयनीय है।

इस समस्या को सुनते ही मनोज रावत जी दूसरे दिन ही बच्ची के घर पहुंच कर उसके परिवार से मुलाकात की , अभी तक जो उनका उपचार चल रहा है उसकी सारी जांच रिपोर्ट देखी और देहरादून स्थित डॉक्टरों से इसमें वार्ता करके आरुषि को देहरादून जौलीग्रांट अस्पताल के लिए रवाना किया और अभी समय-समय पर खुद देहरादून जौलीग्रांट अस्पताल में आरुषि को मिलने जाते हैं और ख़ुशी की बात ये की अब आरुषि की तबियत में पहले से ज्यादा सुधर है इस पर विधायक मनोज रावत ने ख़ुशी व्यक्त कर सोशल मीडिया पर भी ये बात शेयर की थी।

आफत की बारिश ने सब कुछ किया बर्बाद:

भयंकर वर्षा के वजह से हर जगह मुसीबत आई हुई है और इस मुसीबत के घड़ी में मनोज रावत ने किसी का भी साथ नहीं छोड़ा है। चाहे वह किसी भी प्रकार का समस्या क्यों न हो वह अपने कार्य बखूभी निभाते है। वर्षा के केहर के वजह से कई जगह सड़कों पर पानी भर गया है तो कही रोड क्षतिग्रस्त हो गया है लेकिन ऐसी कोई भी जगह नहीं है जहाँ मनोज रावत न पहुँचे हो। उनका एक ही उदेश्य रहा है कि जनता को किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो। इस मुसीबत के घड़ी में वह अपने सभी क्षेत्र में पहुँच कर लोगों से उनकी परेशानियों का जायज़ा लिया। 17 अगस्त को वह ककोला, परकंडी को संकट से बचाते हुए वहाँ की धंस रही सड़को को सही करने के निदेर्श देते हुए वहाँ बड़ी मशीनें उपलब्ध करवाई ताकि सड़क की मरम्मत जल्द से जल्द हो पाए। 17 अगस्त को रैल गावँ में रात्रि विश्राम किया और वहाँ के परिस्थितियों का जायजा लिया। 2013 के आपदा में झूला पल टूट गया था जो पिछले साल बन सका।

12 अगस्त को तल्ला नागपुर के पूर्व निर्धारित कार्यकर्मो के बाद 13 अगस्त को ताला उषाडा से आपदा से प्रभावित इलाकों का दौरा शुरू किया।

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कांदी में विधायकनिधि से जीर्णोद्धार हो रहे उच्च प्राथमिक विद्यालय भवन का निरीक्षण किया गया। 14 अगस्त को बेडुला होते हुए पैदल कालीमठ पहुँचे, कालीमठ घाटी में काफी तबाही के कारण सड़क बंद थी। वहां के लोगों की बस 2 मांगे थी पहला कालीमठ के लिए नारायनकोटि से रणकोट- घतना तोक कालीमठ होते हुए वैकल्पित मोटर मार्ग और दूसरा रुच्छ महादेव हेतु पुल और यह मांगे माननीय मुख्यमंत्री को पत्र द्वारा अवगत करा दिया गया है। इस तरह उन्होंने अपने सभी क्षेत्र में जाकर वहां के समस्याओं को जाना और हर संभव प्रयास की समस्याओं का समाधान करने में, इस आपदा के घड़ी में वह अपने क्षेत्रवासीयों के लिए किसी देवता से कम नहीं है।

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