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Monday, June 14, 2021
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जानिए उत्तराखंड की राजधानी देहरादून का इतिहास और प्रमुख स्थान

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देहरादून उत्तरी भारत के पश्चिमोत्तर उत्तराखंड राज्य में स्थित है। देहरादून 670 मीटर की ऊँचाई पर हिमालय की तराई में स्थित है। भौगोलिक रूप से देहरादून शिवालिक की पहाड़ियों और मध्य हिमालय की पहाड़ियों के बीच में स्थित है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून भारत का प्रसिद्ध पर्वतीय पर्यटक स्थल है। देहरा शब्द का अर्थ निवास स्थान या डेरा है। देहरादून शहर के उत्तर में पर्वतीय नगर मसूरी एक लोकप्रिय ग्रीष्मकालीन पर्यटक केन्द्र है और ऋषिकेश एक महत्त्वपूर्ण तीर्थ स्थल है।

देहरादून की स्थापना:

देहरादून की स्थापना 1699 में हुई थी। कहते हैं कि सिक्खों के गुरु रामराय किरतपुर पंजाब से आकर यहाँ बस गए थे। मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब ने उन्हें कुछ ग्राम टिहरी नरेश से दान में दिलवा दिए थे। यहाँ उन्होंने 1699 ई. में मुग़ल मक़बरों से मिलता-जुलता मन्दिर भी बनवाया जो आज तक प्रसिद्ध है। शायद गुरु का डेरा इस घाटी में होने के कारण ही इस स्थान का नाम देहरादून पड़ गया होगा। इसके अतिरिक्त एक अत्यन्त प्राचीन किंवदन्ती के अनुसार देहरादून का नाम पहले द्रोणनगर था और यह कहा जाता था कि पाण्डव-कौरवों के गुरु द्रोणाचार्य ने इस स्थान पर अपनी तपोभूमि बनाई थी और उन्हीं के नाम पर इस नगर का नामकरण हुआ था। एक अन्य किंवदन्ती के अनुसार जिस द्रोणपर्त की औषधियाँ हनुमान जी लक्ष्मण के शक्ति लगने पर लंका ले गए थे, वह देहरादून में स्थित था, किन्तु वाल्मीकि रामायण में इस पर्वत को महोदय कहा गया है।

देहरादून  का इतिहास (History of Dehradun City):

स्कंद पुराण के मुताबिक, डन ने केदार खण्ड नामक क्षेत्र का हिस्सा बनवाया था। यह तीसरी शताब्दी बीसी के अंत तक अशोक के राज्य में शामिल था। इतिहास द्वारा यह पता चला है कि सदियों से इस क्षेत्र ने गढ़वाल राज्य का हिस्सा रोहिल्लास से कुछ रुकावट के साथ बनाया था। 1815 तक लगभग दो दशकों तक यह गोरखाओं के कब्जे में था। अप्रैल 1815 में गोरखाओं को गढ़वाल क्षेत्र से हटा दिया गया और गढ़वाल को अंग्रेजों ने कब्जा कर लिया। उस वर्ष में तहसील देहरादून का क्षेत्र अब सहारनपुर जिले में जोड़ा गया था। 1825 में, हालांकि, यह कुमाऊ डिवीजन में स्थानांतरित किया गया था। 1828 में, देहरादून और जौनसर भाबार को एक अलग डिप्टी कमिश्नर के पद पर रखा गया और 18 92 में देहरादून जिले को कुमाऊं डिवीजन से मेरठ डिवीजन में स्थानांतरित कर दिया गया। 1842 में, डन सहारनपुर जिले से जुड़ा हुआ था और जिले के कलेक्टर के अधीनस्थ एक अधिकारी के अधीन रखा गया था, लेकिन 1871 से इसे अलग जिले के रूप में प्रशासित किया जा रहा है। 1968 में जिले को मेरठ प्रभाग से निकाला गया और गढ़वाल प्रभाग में शामिल किया गया।

भाषाएँ और धर्म:

जिले में बोली जाने वाली मुख्य भाषाएं हिंदी, सिंधी, पंजाबी, गढ़वाली और उर्दू हैं।

देहरादून में घुमने की प्रमुख जगहें: 

माल्सी डियर पार्क(Malsi Deer Park):

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शिवालिक रेंज की तलहटी पर, माल्सी डियर पार्क, देहरादून से लगभग 10 किमी की दूरी पर स्थित है। यह एक सुंदर पर्यटन स्थल है, जिसको एक छोटे प्राणि पार्क के रूप में विकसित किया गया है। पर्यटक यहां मोर और नील देख सकते हैं, पार्क में हिरणों के लिये भी जाना जाता है। बच्चों के पार्क भी अपने परिसर में स्थित हैं।

लच्छीवाला(lachhiwala dehradun):

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देहरादून से 22 किमी की दूरी पर स्थित लच्छीवाला, घाटी शहर का सबसे लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट है। साल के पेड़ के घने जंगलो से घिरी हुई, जगह महान प्राकृतिक सुंदरता का दावा करती है। जगह का प्रमुख आकर्षण सुसवा नदी पूल है, जहां यात्री पहाड़ियों के ठंडे पानी का आनंद ले सकते हैं। जगह के करीब एक बड़ा पार्क है, जो बच्चों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है।

एफआरआई(Forest Research Institute)

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देहरादून में वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) कौलागढ़ रोड पर स्थित एक प्रमुख अनुसंधान संस्थान है। संस्थान 1906 में स्थापित किया गया था और लगभग 450 हेक्टेयर के एक बड़े क्षेत्र में है। यह संस्थान अपनी शानदार इमारत के लिए प्रसिद्द है, जो ग्रीको-रोमन और वास्तुकला के औपनिवेशिक शैली के एक अद्भुत समामेलन का प्रतिनिधित्व करती है।

सहस्त्रधारा(sahastradhara):

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सहस्त्रधारा एक खूबसूरत और लोकप्रिय स्थान है, जो देहरादून से लगभग 11 किमी की दूरी पर स्थित है। सहस्त्रधारा का शाब्दिक अर्थ ‘हजार गुना वसंत’ है। सुंदर झरना लगभग 9 मीटर गहरा है। बाल्दी नदी और उसके आसपास के क्षेत्र में स्थित गुफायें, इस जगह की सुंदरता को जोड़ती हैं, और इसे एक आदर्श पिकनिक स्थल बनाती हैं।

लक्ष्मण सिद्ध मंदिर(laxman siddh temple):

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लक्ष्मण सिद्ध मंदिर देहरादून से 12 किमी की दूरी पर हरिद्वार और ऋषिकेश के रास्ते पर स्थित है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, सेंट-स्वामी लक्ष्मण सिद्ध ने इस स्थान पर तपस्या की थी। भक्त बड़ी संख्या में लोकप्रिय लक्ष्मण सिद्ध मेले के दौरान, मंदिर जाते हैं, जो हर साल आयोजित किया जाता है।

घण्टाघर देहरादून (clock tower dehradun):

Dehradun-clock-tower-rantraibaar - rantraibaar.in | Garhwali News Portal

देहरादून शहर में क्लॉक टॉवर एक लोकप्रिय ऐतिहासिक स्मारक है। यह राजपुर रोड पर स्थित है और शहर का एक प्रमुख आकर्षण है। टॉवर एक महत्‍वपूर्ण ऐतिहासिक प्रासंगिकता रखता है और ब्रिटिश स्थापत्य शैली का एक सही चित्रण है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस टावर की घड़ी के घंटे की ध्‍वनि दूर स्थानों से सुनी जा सकती है। वर्तमान में, छह-मुखी टॉवर कार्यात्मक नहीं है, लेकिन फिर भी हर दिन स्थानीय दर्शकों और पर्यटकों की बड़ी संख्या को आकर्षित करता है।

पलटन बाजार(paltan bazar dehradun):

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पलटन बाजार देहरादून के सबसे लोकप्रिय खरीदारी केन्द्र है। दून बासमती चावल और भव्य ऊनी वस्त्र इस बाजार के मुख्य आकर्षण रहे हैं। पर्यटक यहां से कलाकृतियां और उच्च गुणवत्ता वाले मसाले खरीद सकते हैं। यह बाजार शहर की असली तस्वीर प्रस्‍तुत करता है।

संग्रहालय(zonal museum Dehradun) 

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संग्रहालय को क्षेत्रीय संग्रहालय के रूप में भी जाना जाता है, ऐतिहासिक और प्राचीन वस्तुओं में रुचि रखने वाले पर्यटक देहरादून की इस जगह पर जरूर जायें। यह हरिद्वार रोड पर स्थित है और साप्‍ताहिक दिनों में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुलता है (यह सरकारी छुट्टियों पर बंद रहता है)। इस जगह को जनता के देखने के लिए 1971 में खोला गया था।

राम राय गुरुद्वारा(Guru Ram Rai Gurudwara Dehradun)

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राम राय गुरुद्वारा 7वें सिख गुरु, राम राय द्वारा 17 वीं सदी में स्थापित किया गया था। यह एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है और यहां के द्वार सभी धर्मों के लोगों के लिए खुले हैं, वे यहां आकर प्रार्थना कर सकते हैं या चढ़ावा चढ़ा सकते हैं।  हिंदुओं के लोकप्रिय त्‍योहार होली के पांचवें दिन, गुरुद्वारा का वार्षिक उत्सव मनाया जाता है।

टपकेश्‍वर महादेव मंदिर(tapkeshwar temple):

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टपकेश्‍वर महादेव मंदिर एक लोकप्रिय गुफा मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह देहरादून शहर के बस स्टैंड से 5.5 किमी दूर स्थित एक प्रवासी नदी के तट पर स्थित है। टपक एक हिन्दी शब्द है, जिसका मतलब है बूंद-बूंद गिरना। यह कहा जाता है कि मंदिर में एक शिवलिंग है और गुफा की छत से पानी स्‍वाभाविक रूप से टपकता रहता है।

भारतीय सैन्य अकादमी(Indian Military Academy):

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भारतीय सैन्य अकादमी वह केंद्र है, जहां भारतीय सेना के अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। यह 1 अक्टूबर, 1932 को 40 जेंटलमैन कैडेट बलों के साथ सक्रिय हुआ था। ब्रिगेडियर एल.पी. कोलिन्स अकादमी के पहले कमांडेंट थे। दिसम्बर 1934 में, पहले बैच, ‘पायनियर्स’ अकादमी से पास करके निकला। गर्व पूर्व छात्रों, फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ, जनरल मोहम्मद मूसा और लेफ्टिनेंट जनरल स्मिथ डन, जो बाद में भारत, पाकिस्तान और बर्मा की सेना में शीर्ष पदों के पर क्रमशः आसीन हुए।

अकादमी को जनवरी 1950 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के रूप में नया नाम दिया गया। एनडीए आपरेशनों को खड़कवासला, पुणे में स्थानांतरित किये जाने के बाद, अकादमी को फिर से मिलिटरी कॉलेज का नाम दिया गया। 1960 में, इसको वापस अपना मूल नाम आईएमए दिया गया था। वहाँ अकादमी के परिसर में एक शूटिंग प्रदर्शन का कमरा, एक संग्रहालय, 18 छिद्र एफआरआईएमएस गोल्फ कोर्स और एक युद्ध स्मारक हैं। परिसर में एक हेलिपैड भी है, जो टोंस घाटी में उत्तर पश्चिम दिशा में स्थित है।

चन्द्रबाणी(chandrabani temple):

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देहरादून से लगभग 7 किमी की दूरी पर स्थित, चन्द्रबाणी एक लोकप्रिय धार्मिक स्थल है। मंदिर देहरादून-दिल्ली रोड पर स्थित है और गौतम कुंड के लिए प्रसिद्ध है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, वैदिक युग के सात संतों में से एक महर्षि गौतम, अपनी पत्नी, अहिल्या और बेटी, अंजनी के साथ यहां रहते थे। एक और पौराणिक कथा के अनुसार, यह वही जगह है जहाँ स्वर्ग की बेटी, गंगा खुद प्रकट हुई थीं। पवित्र गौतम कुंड में डुबकी लगाने के लिए बड़ी संख्या में भक्त यहां आते हैं।

संतला देवी मंदिर(santala devi mandir)

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संतला देवी मंदिर देहरादून से लगभग 15 किमी की दूरी पर स्थित है। जैतूनवाला तक जाने वाली बस सेवा का लाभ उठाकर यात्री मंदिर तक जा सकते हैं। वहां से पंजाबीवाला 2 किलोमीटर दूर है।  पंजाबीवाला से यात्रियों को मंदिर तक पहुंचने के लिये करीब 2 की पैदल चढ़ाई चढ़नी होती है।

साईं दरबार मंदिर(Sai Darbar Temple):

Sai Darbar Temple, Rajpur Road - Tourist Attraction in Dehradun - Justdial

साई दरबार मंदिर देहरादून का एक प्रसिद्ध धार्मिक केंद्र है। मंदिर सभी जाति और धर्मों के लोगों के लिए खुला है, और साईं बाबा की धर्मनिरपेक्ष शिक्षाओं का प्रतीक है। यह मंदिर राजपुर रोड पर क़्लाॅक टाॅवर से लगभग 8 किमी की दूरी पर स्थित है। मंदिर अपने सुंदर वातावरण और राजसी संगमरमर संरचना के लिए जाना जाता है।

यह प्रतिदिन भक्तों की एक बड़ी संख्या द्वारा भरा रहता है। शाम के दौरान, मंदिर परिसर में एक प्रार्थना सत्र होता है। जगह की शांति इसे उन लोगों के लिए एक आदर्श जगह बनाती है, जो मन की शांति खोजते हैं और शहर के जीवन की उथल-पुथल से थोड़ी देर के लिए छुट्टी चाहते हैं।

बुद्धा की भक्ति और माइंड्रोलिंग मॉनेस्ट्री (Buddha Temple Dehradun)-

Buddha Temple Dehradun - Buddha Temple Picnic Spot in Clement Town Dehradun

बुद्धा मंदिर के नाम से भी जानी जाने वाली माइंड्रोलिंग मॉनेस्ट्री भी देहरादून की शान है। इसको 1965 में बनवाया गया था। इसको बुद्धा से जुड़ा बड़ा सेंटर माना जाता है। यहां दुनियाभर से लाखों लोग आते हैं। चारों ओर से हरियाली से घिरी हुई इस मॉनेस्ट्री में एशिया का साबसे ऊंचा स्तूप भी बना है। ये मॉनेस्ट्री आर्किटेक्चरल मास्टरपीस भी मानी जाती है।

रॉबर्स केव य गुच्छुपानी (robbers cave Dehradun)-

Robbers Cave Dehradun, GuchhuPani Timings, Entry Fee, How to reach

देहरादून से 8 किलोमीटर दूर बनी इस गुफा के बींचोबीच पानी बहता है। माना जाता है कि नदी वाली इस गुफा में भगवान शिव का रहा करते थे। यहां आकार आपको लगेगा मानो खुद प्रकृति मां के दर्शन हो रहे हैं। आसपास के लोग अक्सर यहां पिकनिक के लिए आते हैं। यहां बहता पानी कुछ ज्यादा ही ठंडा रहता है।

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