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Wednesday, April 21, 2021
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जानिए उत्तराखंड का भूगोल और भौगोलिक संरचना

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उत्तराखंड के 86 प्रतिशत भाग पर पहाड़ एवं 65 प्रतिशत भाग पर जंगल पाए जाते हैं। क्षेत्रफल की दृष्टि से यह भारत का 18वाँ राज्य हैं, राज्य के कुल क्षेत्रफल का 86.07% भाग (46035 वर्ग किलोमीटर) पर्वतीय तथा 13.93% भाग (7448 वर्ग किलोमीटर) मैदानीय हैं। उत्तराखण्ड राज्य का क्षेत्रफल 53,484 वर्ग किमी और जनसंख्या 8,479,562 (2001 की जनगणना के अनुसार) है। उत्तराखण्ड भारत के उत्तर – मध्य भाग में स्थित है। यह पूर्वोत्तर में तिब्बत, पश्चिमोत्तर में हिमाचल प्रदेश, दक्षिण – पश्चिम में उत्तर प्रदेश और दक्षिण – पूर्व में नेपाल से घिरा है। उत्तराखण्ड का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 28° 43’ उ. से 31°27’ उ. और रेखांश 77°34’ पू. से 81°02’ पू के बीच में 53,483 वर्ग किमी है, जिसमें से 43,035 किमी पर्वतीय है और 7,448 किमी मैदानी है, तथा 34,651 किमी भूभाग वनाच्छादित है। राज्य का अधिकांश उत्तरी भाग वृहद्तर हिमालय श्रृंखला का भाग है, जो ऊँची हिमालयी चोटियों और हिमनदियों से ढ़का हुआ है, जबकि निम्न तलहटियाँ सघन वनों से ढ़की हुई हैं जिनका पहले अंग्रेज़ लकड़ी व्यापारियों और स्वतन्त्रता के बाद वन अनुबन्धकों द्वारा दोहन किया गया। हाल ही के वनीकरण के प्रयासों के कारण स्थिति प्रत्यावर्तन करने में सफलता मिली है। हिमालय के विशिष्ठ पारिस्थितिक तन्त्र बड़ी संख्या में पशुओं – जैसे भड़ल, हिम तेंदुआ, तेंदुआ, और बाघ, पौंधो, और दुर्लभ जड़ी-बूटियों का घर है।

उत्तराखंड भौगोलिक संरचना:

  • उत्तराखंड के पूर्व में पिथौरागढ़ तथा नेपाल है
  • उत्तराखंड के उत्तर में उत्तरकाशी , तिब्बत  तथा  चीन है
  • उत्तराखंड के पश्चिम में देहरादून तथा  हिमांचल प्रदेश है
  • उत्तराखंड के  दक्षिण में  उधम सिंह नगर तथा  उत्तर प्रदेश है

भौगोलिक परिस्तिथियों के आधार पर उत्तराखंड को 8 भागों में बांटा गया है:

  1. गंगा का मैदान
  2. तराई क्षेत्र
  3. भाभर क्षेत्र
  4. शिवालिक क्षेत्र
  5. दून क्षेत्र
  6. लघु (मध्य) हिमालीय क्षेत्र
  7. वृहत (उच्च) हिमालयी क्षेत्र
  8. ट्रांस हिमालयी क्षेत्र

1. गंगा का मैदान:

राज्य के हरिद्वार जिले का अधिकांश भाग गंगा के मैदान के अन्तर्गत आता है।

2. तराई क्षेत्र:

  • हरिद्वार में गंगा के मैदान के तुरंत बाद उत्तर क्षेत्र
  • तराई क्षेत्र में पाताल तोड़ कुएँ मिलते हैं।
  • नमी अधिक होने के कारण तराई क्षेत्र को तरीवाला नाम से भी जाना जाता है।
  • तराई क्षेत्र में पंजाब, हरियाणा, बंगाल आदि राज्यों के लोग निवास करते है।

3. भाभर क्षेत्र:

  • तराई क्षेत्र के ठीक उत्तर में स्थित कंकड़-पत्थर से युक्त क्षेत्र को भाभर क्षेत्र कहा जाता है।
  • इस क्षेत्र की मृदा कंकड़, पत्थर तथा मोटे बालू से युक्त होती है।
  • इस क्षेत्र की मिट्टी कृषि के लिए अनुपयुक्त है।

 4. शिवालिक क्षेत्र:

  • भाभर क्षेत्र के तुरन्त उत्तर के पहाड़ियों को शिवालिक या बाह्य हिमालय या हिमालय पाद कहा जाता है।
  • राज्य में शिवालिक श्रेणी की औसत चौड़ाई तथा ऊंचाई 10 से 20 किमी. एवं 700 से 1200 मी है।
  • यह हिमालय की सबसे नवीन श्रेणी है।
  • इसका निर्माण 1.75 लाख वर्ष पूर्व से 3 करोड़ वर्ष पूर्व (मायोसीन से निम्न प्लाइस्टोसीन) के मध्य हुआ।
  • उत्तराखण्ड के अधिकांश पर्यटन केन्द्र शिवालिक क्षेत्र में स्थित हैं।
  • शिवालिक पहाड़ियों को प्राचीनकाल में मैनाक कहा जाता था।
  • शिवालिक शब्द शिव व अलक शब्दों से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है शिव की भौहें।

5. दून क्षेत्र:

  • राज्य में शिवालिक व मध्य हिमालय के बीच की चौरस घाटियों को दून या द्वार कहते हैं।
  • देहरा (देहरादून), कोठरी व चौखंभा (पौढ़ी) तथा पतली व कोटा (नैनीताल) दून या द्वार हैं।
  • राज्य का सबसे बड़ा व प्रसिद्ध द्वार (देहरा (देहरादून) 70 किमी लम्बा व 24 से 32 किमी चौड़ा है।

6. लघु (मध्य) हिमालीय क्षेत्र:

  • यह पर्वत श्रेणी शिवालिक के उत्तर तथा वृहत हिमालय के दक्षिण चंम्पावत, नैनीताल,अल्मोड़ा,पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग,टिहरी, उत्तरकाशी तथा देहरादून आदि 9 जिलों में विस्तृत हैं।
  • इसकी ऊंचाई 1200 से 4500 मी. हैं।
  • लघु या मध्य हिमालय के अन्तर्गत चमोली, पौढ़ी तथा अल्मोड़ा जिलो में फैले दूधातोली श्रृंखला को उत्तराखण्ड का पामीर कहते है।
  • यहाँ शीतोष्ण कटिबंधीय सदाबहार प्रकार के कोणधारी वन पाये जाते है।

7. वृहत (उच्च) हिमालयी क्षेत्र:

वृहत (उच्च) हिमालय की प्रमुख चोटियां

  • नन्दादेवी (7817 मी.
  • कामेट (7756 मी.)
  • नन्दादेवी पूर्वी (7434 मी.)
  • बद्रीनाथ (माणा) (7272 मी.)
  • चौखम्बा
  • त्रिशूल (7120 मी.)
  • दूनागिरि
  • केदारनाथ
  • मलारी (नीति)

राज्य की अधिकांश ऊंची पवर्त चोटियां वृहत्त या उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित हैं।

8. ट्रांस हिमालयी क्षेत्र:

  • यह हिमालय के उत्तर में स्थित है।
  • इसका कुछ भाग भारत में और कुछ चीन में है।
  • इसकी ऊंचाई 2500 से 3500 मी. है।

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