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Friday, April 23, 2021
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जानिए उत्तराखंड की प्रमुख नदियों के बारे में

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उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही झलकती है। देश-विदेश से लोग उत्तराखंड की सुंदरता देखने आते हैं। उत्तराखण्ड की नदियाँ भारतीय संस्कृति में सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। उत्तराखण्ड अनेक नदियों का उद्गम स्थल है। यहाँ की नदियाँ सिंचाई व जल विद्युत उत्पादन का प्रमुख संसाधन है। इन नदियों के किनारे अनेक धार्मिक व सांस्कृतिक केन्द्र स्थापित हैं। हिन्दुओं की अत्यन्त पवित्र नदी गंगा का उद्गम स्थल मुख्य हिमालय की दक्षिणी श्रेणियाँ हैं। गंगा का प्रारम्भ अलकनन्दाभागीरथी नदियों से होता है। अलकनन्दा की सहायक नदी धौली, विष्णु गंगा तथा मंदाकिनी है। गंगा नदी, भागीरथी के रूप में गौमुख स्थान से 25 कि॰मी॰ लम्बे गंगोत्री हिमनद से निकलती है। भागीरथी व अलकनन्दा देवप्रयाग संगम करती है जिसके पश्चात् वह गंगा के रूप में पहचानी जाती है। यमुना नदी का उद्गम क्षेत्र बन्दरपूँछ के पश्चिमी यमनोत्री हिमनद से है। इस नदी में होन्स, गिरी व आसन मुख्य सहायक हैं। राम गंगा का उद्गम स्थल तकलाकोट के उत्तर पश्चिम में माकचा चुंग हिमनद में मिल जाती है। सोंग नदी देहरादून के दक्षिण पूर्वी भाग में बहती हुई वीरभद्र के पास गंगा नदी में मिल जाती है। इसके अतिरिक्त गोरी गंगा, काली गंगा,रामगंगा,कोसी,लाधिया,गौला आदि उत्तराखंड की प्रमुख नदिया हैं ।

उत्तराखंड राज्य में बहनें वाली प्रमुख नदियाँ और उनके उद्गम स्थल-

1- अलकनंदा नदी- उत्तराखंड राज्य की पवित्र नदी अलकनंदा का प्राचीन नाम विष्णुगंगा है,तथा गंगा के 4 नामों में से एक हैै। गंगोत्री में गंगा को भागीरथी,केदारनाथ में मंदाकिनी तथा बद्रीनाथ में गंगा को अलकापुरी के नाम से जाना जाता है। देवप्रयाग में अलकनंदा तथा भागीरथी नदियों का संगम होता है तथा देवप्रयाग के बाद भागीरथी और अलकनंदा मिलकर उत्तराखंड की एक और पवित्र नदी गंगा का निर्माण करती हैं। सतोपंथ और भागीरथ खरक नामक हिमनद अलकनंदा नदी के उद्गम स्थल हैं। अलकनंदा नदी की औसत गहराई 1.3 मीटर तथा अधिकतम गहराई 4.4 मीटर है। उत्तराखंड राज्य में होने वाले  नदियों के संगमों में अलकनंदा नदी की महत्वपूर्ण भूमिका है।

  • देवप्रयाग = अलकनंदा तथा भागीरथी नदियों का संगम
  • नंदप्रयाग = अलकनंदा तथा नंदाकिनी नदियों का संगम
  • कर्णप्रयाग = अलकनंदा तथा पिण्डर नदियों का संगम
  • रुद्रप्रयाग = अलकनंदा तथा मन्दाकिनी नदियों का संगम

2- भागीरथी नदी- उत्तराखंड राज्य की पवित्र नदी भागीरथी गंगा नदी की प्रमुख सहायक नदी है, जिसका उद्गम स्थल उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री धाम से लगभग 20 किलोमीटर दूर गंगोत्री ग्लेशियर अथवा गौमुख है। गंगोत्री ग्लेशियर की लम्बाई लगभग 30 किलोमीटर तथा चौडाई 2 किलोमीटर है जो कि वर्तमान में ग्लोबल वार्मिंग की बजह से कम होती जा रही है। रुद्रगंगा,केदारगंगा,जाडगंगा,असीमगंगा तथा भिलंगना भागीरथी नदी की प्रमुख सहायक नदियाँ है।

  • रुद्रगंगा गंगोत्री ग्लेशियर के पास रुद्रगेरा नामक ग्लेशियर से निकलती है।
  •  केदारगंगा का उद्गम स्थल केदारताल है।
  • जाडगंगा भैरोघाटी नामक स्थान पर भागीरथी नदी से मिलती है।
  •  असीमगंगा गंगोत्री में भागीरथी नदी से मिलती है।

भागीरथी नदी पर ही विश्व का पांचवा सबसे ऊँचा बांध टिहरी बांध बनाया गया है, जिसकी ऊँचाई 216 मीटर है। टिहरी बांध में 2400 मेगा वाट विधुत उत्पादन होता है, तथा इस बांध से 2,70,000 हेक्टर क्षेत्र की सिंचाई होती है।

3- गंगा नदी- गौमुख से निकली पवित्र नदी भागीरथी नदी को ही देवप्रयाग के बाद गंगा नदी कहा जाता है। देवप्रयाग में भागीरथी और अलकनंदा दोनों नदियों का संगम होता है, और उसके आगे बहने वाली नदी गंगा कहलाती है। देवप्रयाग में होने वाले संगम को सास – बहू नदियों का संगम भी कहा जाता है। गंगा के अनेक रूप हैं तथा बहुत सी कथाएं प्रचलित हैं। पुराणों में गंगा नदी को “मोक्षदायिनी ” बताया गया है। स्वर्ग में अलकनंदा , पृथ्वी में भागीरथी या जाह्न्वी तथा पाताल में गंगा को अधो गंगा या पाताल गंगा के नाम से जाना जाता है।

4- यमुना नदी- उत्तराखंड राज्य की पवित्र नदी यमुना बन्दरपूंछ पर्वत पर स्थित यमुनोत्री हिमनद के यमुनोत्रीकांठा से निकलती है। ऋषिगंगा,हनुमान गंगा,कृष्णागाड,टोन्स तथा आसन यमुना की सहायक नदियाँ हैं किन्तु, टोन्स नदी यमुना की प्रमुख सहायक नदी है। टोन्स नदी बन्दरपूंछ पर्वत से ही स्वर्गारोहिणी ग्लेशियर से निकलती है। उत्तराखंड में यमुना नदी की लम्बाई 136 किलोमीटर है, जबकि यमुनोत्री से इलाहाबाद तक यमुना की कुल लम्बाई 1384 किलोमीटर है। यमुना नदी से सम्बंधित पौराणिक मान्यता है कि यमुना को भगवान् सूर्य की पुत्री कहा जाता है। सूर्य की पुत्री होने की बजह से यमुना नदी का एक नाम “सूर्यतनया” भी है , तथा यमराज की बहन होने के कारण यमुना नदी का एक नाम “यमी” भी हैै।

5- पिण्डर नदी- पिण्डर नदी का उद्गम स्थान पिण्डर ग्लेशियर है। यह नदी पिण्डर ग्लेशियर से निकलकर कर्णप्रयाग तक बहती है। नदी की लम्बाई 105 किलोमीटरहै तथा गंगा की यह प्रमुख सहायक नदी है। कर्णप्रयाग में अलकनंदा तथा तथा पिण्डर नदियों का संगम होता है। उत्तराखंड राज्य की  दो प्रमुख नदियों का संगम होने की बजह से यह संगम हिन्दू धर्म का पवित्र स्थल है।

6- सरयू नदी- सरयू नदी सरमूलसे निकलकर कपकोट, बागेश्वर, शेराघाट और रामेश्वर से बहते हुए पंचेश्वर में काली नदी में गिर जाती है जो कि काली नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है। बैजनाथ तीर्थ और बागेश्वर नगर सरयू नदी के तट पर ही स्थित है। सरयू की प्रथम सहायक नदी गोमती है जो कि सरयू से बागेश्वर में मिलती है। स्थानीय भाषा में सरयू नदी की सरजू कहा जाता है। सरमूल से पंचेश्वर तक इस नदी की लम्बाई 146 किलोमीटर है। 

7- रामगंगा नदी- रामगंगा को दो भागों में विभाजित किया गया है तथा दोनों का उद्गम स्थल उत्तराखंड में ही है |

  1. पूर्वी रामगंगा
  2. पश्चिमी रामगंगा

पूर्वी रामगंगा उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जिले में स्थित नामिक ग्लेशियर से निकलती है और पूर्व की ओर बहती है। अंत में पूर्वी रामगंगा पिथौरागढ़ के घाट के पास रामेश्वर में सरजू नदी के साथ मिल जाती है। पश्चिमी रामगंगा पौड़ी,चमोली तथा अल्मोड़ा में फैले दूधातोली पर्वत श्रेणी से निकलती है। इन तीनों जिलों में 155 किलोमीटर बहने के बाद पौड़ी के कालागढ़ नामक स्थान पर यह राज्य से बाहर निकल जाती है। राज्य के बाहर निकलने के बाद यह नदी उत्तर प्रदेश के कन्नौज के पास गंगा नदी से मिल जाती है।

8- विष्णुगंगा नदी- इस नदी का समायोजन अलकनंदा नदी में विष्णुप्रयाग में हुआ है।

9- भ्युन्दर नदी- भ्युन्दर नदी (ध्वल गंगा) जो अलकनंदा की सहायक नदी है, कामत हिमशिखर के पूर्व से निकली है।

10- धौलीगंगा नदी- यह नदी, जो अलकनंदा की सहायक नदी है, गढ़वाल और तिब्बत के बीच नीति दर्रे से निकली है। इसमें कई अन्य छोटी नदियॉं मिलती है जैसे – पर्ला, कामत, जैन्ती, अमृतगंगा तथा गिर्थी नदियॉ।

11- अमृतगंगा नदी- यह नदी कागभुसंड शिखर के बनकुण्ड हिमखण्ड से निकली है।

12- दूधगंगा नदी- यह नदी कालापानी हिमखण्ड से निकली है।

13- मंदाकिनी नदी- यह नदी केदारनाथ क्षेत्र में 3800 मी0 ऊँचाई पर सतोपंथ तथा खरक हिम खण्डों से निकली है, तथा बाद में रूद्रप्रयाग के पास अलकनंदा नदी में मिल जाती है।

14- टोंस नदी- यह नदी हर-की-दून घाटी से निकलती है तथा कालसी में यमुना नदी में मिलती है।

15सोंग नदी- यह नदी दून घाटी के मध्यपूर्वी भाग के पानी को लेकर बनी है तथा ऋषिकेश व हरिद्वार के बीच गंगा में मिलती है।

16- काली नदी- यह नदी या कालीगंगा का जलागम पूर्वी कुमाऊँ व पश्चिमी नेपाल क्षेत्र है। इसकी सहायक नदियॉं है धोलीगंगा (पूर्वोत्तर कुमाऊँ गोरी गंगा (उत्तर-मध्य कुमाऊँ), सरजू तथा लधिया नदियॉं है।

17- कोसी नदी- यह नदी प्राकृतिक जल स्रोतों से बनी है तथा अल्मोड़ा के पास से निकलती है।

18- जाह्नवी नदी- यह नदी उत्तरकाशी के पास भगीरथी नदी में मिलती है।

19- नन्दाकिनी नदी- यह नदी नन्द प्रयाग के पास अलकनन्दा नदी में मिलती है।

20- गोला नदी- यह नदी प्राकृतिक स्रोतों द्वारा बनी कुमाऊँ की तलहटी में एक छोटी नदी है, जिसका जलागम शिवालिक पर्वतों पर हल्द्वानी शहर का पूर्वी भाग है।

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