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Wednesday, April 21, 2021
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जानिए उत्तराखंड के प्रसिद्ध महादेव के मंदिरों के बारे में, ऋग्वेद और पुराणों में भी है जिक्र

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उत्तराखंड में बहुत से ऐसे मंदिर है जो पूरे विश्व में विख़्यात है। ऐसे ही कुछ महादेव के मंदिर है, जहा बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। उत्तराखंड को ही देवभूमि का दर्जा प्राप्त है, इसका कारण यह है कि यहां कई हिन्दू देवी-देवताओं का निवास स्थान है। मनमोहक प्राकृतिक आकर्षणों, घने जगंलों और हिम पर्वतों से घिरा उत्तराखंड दुनिया भर में भारत का प्रतिनिधित्व करता है। आइये आज हम आपको इस पहाड़ी राज्य के सबसे प्रसिद्ध शिव मंदिरों के बारे में बताते हैं।

केदारनाथ मंदिर, रूद्रप्रयाग:

Kedarnath temple gates to open for pilgrims from April 29 | Kedarnath News – India TV

केदारनाथ को हिन्दुओं के पवित्रतम स्थानों यानी चार धामों में से एक माना जाता है और धार्मिक ग्रंथों में उल्लिखित बारह ज्योतिर्लिंगों में से सबसे ऊँचा ज्योतिर्लिंग यहीं पर स्थित है। यह समुद्रतल से 3584 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह उत्तराखंड का सबसे विशाल शिव मंदिर है, जो कटवां पत्थरों के विशाल शिलाखंडों को जोड़कर बनाया गया है। ये शिलाखंड भूरे रंग के हैं। मंदिर लगभग 6 फुट ऊंचे चबूतरे पर बना है। इसका गर्भगृह अपेक्षाकृत प्राचीन है जिसे 80वीं शताब्दी के लगभग का माना जाता है। चार छोटा चार धाम स्थलों का सबसे दूरस्थ, केदारनाथ हिमालय में स्थित है, मंदाकिनी नदी के स्रोत, चोराबाड़ी ग्लेशियर के पास समुद्र तल से लगभग 3,583 मीटर (11,755 फीट) ऊपर है, और बर्फ से ढकी चोटियों से घिरा है, सबसे प्रमुख केदारनाथ है। पहाड़। निकटतम सड़क प्रमुख गौरीकुंड में लगभग 16 किमी दूर है। केदारनाथ प्राचीन काल से एक तीर्थस्थल रहा है। यह निश्चित नहीं है कि मूल केदारनाथ मंदिर का निर्माण किसने और कब किया था। एक पौराणिक वृत्तांत महाभारत में वर्णित पौराणिक पांडव बंधुओं के मंदिर निर्माण का वर्णन करता है। हालांकि, महाभारत में केदारनाथ नामक किसी स्थान का उल्लेख नहीं है। केदारनाथ का सबसे पहला संदर्भ स्कंद पुराण (सी। 7 वीं -8 वीं शताब्दी) में मिलता है, जिसका नाम केदार (केदारनाथ) है, जहां शिव ने अपने उलझे हुए बालों से गंगा के पवित्र जल को छोड़ा, जिसके परिणामस्वरूप गंगा का निर्माण हुआ। शंकर के पवित्र विश्राम स्थल को चिह्नित करने वाले एक स्मारक के खंडहर केदारनाथ में स्थित हैं। केदारनाथ निश्चित रूप से 12 वीं शताब्दी तक एक प्रमुख तीर्थस्थल था, जिसका उल्लेख गढ़वाल मंत्री भट्ट लक्ष्मीधर द्वारा लिखित कृतिका-कल्पतरु में मिलता है।

चोपता तुंगनाथ मंदिर, रूद्रप्रयाग:

तुंगनाथ मंदिर के दर्शन की जानकारी - Tungnath Temple Chopta Uttarakhand In Hindi

पंच केदारों में से एक तुंगनाथ मंदिर को दुनिया का सबसे उच्चतम ऊँचाई पर स्तिथ शिव मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर तुंगनाथ माउंटेन रेंज में समुद्र स्तर से 3680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण अर्जुन ने किया था जो कि पांडवों में से एक थे और जिनका विवरण हिंदू महाकाव्य महाभारत में है। एक कथा के अनुसार इस मंदिर को पंचकेदार इसलिए माना जाता है कि महाभारत के युद्ध के बाद पांडवो अपने पाप से मुक्ति चाहते थे इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवो को सलाह दी थी कि वे भगवान शंकर का आर्शीवाद प्राप्त करे। इसलिए पांडवो भगवान शंकर का आर्शीवाद प्राप्त करने के लिए वाराणसी पहुंच गए परन्तु भगवान शंकर वाराणसी से चले गए और गुप्तकाशी में आकर छुप गए क्योकि भगवान शंकर पंाडवों से नाराज थे पांडवो अपने कुल का नाश किया था। जब पांडवो गुप्तकाशी पंहुचे तो फिर भगवान शंकर केदारनाथ पहुँच गए जहां भगवान शंकर ने बैल का रूप धारण कर रखा था। पांडवो ने भगवान शंकर को खोज कर उनसे आर्शीवाद प्राप्त किया था। ऐसा माना जाता है कि जब भगवान शंकर बैल के रूप में अंतर्ध्यान हुए, तो उनके धड़ से ऊपर का भाग काठमाण्डू में प्रकट हुआ। अब वहां पशुपतिनाथ का प्रसिद्ध मंदिर है। शिव की भुजाएं तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में, नाभि मध्यमाहेश्वर में, भगवान शंकर बैल की पीठ की आकृति-पिंड के रूप में श्री केदारनाथ में पूजे जाते हैं और जटा कल्पेश्वर में प्रकट हुए। इसलिए इन चार स्थानों सहित श्री तुंगनाथ को पंचकेदार कहा जाता है। तुंगनाथ की चोटी तीन धाराओं का स्रोत है, जिनसे अक्षकामिनी नदी बनती है। मंदिर चोपता से 3 किलोमीटर दूर स्थित है। कहा जाता है कि पार्वती माता ने शिव जी को प्रसन्न करने के लिए यहां ब्याह से पहले तपस्या की थी । यह पूरा पंचकेदार का क्षेत्र कहलाता है। तुंगनाथ में ‘बाहु‘ यानि शिव के हाथ का हिस्सा स्थापित है। यह मंदिर करीब एक हजार साल पुराना माना जाता है। यहाँ भगवान शिव की पंच केदारों में से एक के रूप में पूजा होती है।

कोटेश्वर महादेव मंदिर, रूद्रप्रयाग:

Millions Of Shivling In This Temple Koteshwar Mahadev - भोले के इस मंदिर में हैं लाखों शिवलिंग, देखेंगे तो आंखों पर नहीं होगा यकीन - Amar Ujala Hindi News Live

कोटेश्वर महादेव मंदिर एक हिंदू मंदिर है जो शिव को समर्पित है, और यह उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के केंद्र से लगभग 3 किलोमीटर (3,000 मीटर) पर स्थित है, जो अलकनंदा नदी से थोड़ा ऊपर है। अलकनंदा के तट पर बना प्राचीन दर्शनीय स्थल कोटेश्वर महादेव मं‌दिर अपने आप में आलौकिक है। कहा जाता है कि भस्मासुर से बचने के लिए भगवान शिव इसी गुफा में छिपे थे। इस गुफा वाले मंदिर के आसपास शांतिमय और सम्मोहित कर देने वाला माहौल है। मान्यता है कि कौरवों की मृत्यु के बाद जब पांडव मुक्ति का वरदान मांगने के लिए भगवान शिव को खोज रहे ‌थे तो शिव इसी गुफा मे ध्यानावस्था में रहे थे। कोटेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण 14वि शताब्दी में किया गया था, इसके बाद 16 वी और 17 वी शताब्दी में मंदिर का पुनः निर्माण किया गया था। चारधाम की यात्रा पर निकले ज्यादातर श्रद्धालु इस मंदिर को देखते हुए ही आगे बढते है , गुफा के रूप में मौजूद यह मंदिर अलकनंदा नदी के किनारे पर स्थित है। मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने केदारनाथ जाते समय, इस गुफा में साधना की थी और यह मूर्ति प्राकर्तिक रूप से निर्मित है | गुफा के अन्दर मौजूद प्राकृतिक रूप से बनी मूर्तियाँ और शिवलिंग यहाँ प्राचीन काल से ही स्थापित है।

दंडेश्वर मंदिर अल्मोड़ा:

Dandeshwar Temple Jageshwar Almora - How To reach Dandeshwar Shiva Temple

ऐसा ही एक मंदिर है जागेश्वर का जिसे दंडेश्वरमहादेव के नाम से अधिक जानते हैं। यह जगह अल्मोड़ा से 38 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, मंदिर परिसर के चारों तरफ देवदार के घने जंगल हैं। इसे उत्तराखंड का पांचवाँ धाम भी कहते हैं यहां पर कुल मिलाकर 124 मंदिरों का समूह हैं। दंडेश्वर महादेव मंदिर परिसर में एक मुख्य मंदिर और चौदह अधीनस्थ मंदिर है, ज्यादातर मंदिरों में शिवलिंग और कुछ में चतुर्मखलिंग स्थापित है।

बैरासकुंड मंदिर चमोली:

रावण की तपस्थली - बैरासकुण्ड, चमोली गढ़वाल"

उत्तराखंड के चमोली जिले में बैरासकुंड गाँव में स्थित, बैरासकुंड महादेव मंदिर एक प्राचीन मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है। बैरासकुंड में कई प्राचीन मंदिर हैं और बैरास्कुंड महादेव मंदिर उनमें से सबसे लोकप्रिय है। उत्तराखण्ड के जिस स्थान पर रावण ने मुण्डों की आहूति देकर पितामह ब्रह्मा को रिझाया था, उस स्थान का नाम है- बैरासकुण्ड. यह स्थान जनपद चमोली के परगना दशोली के अन्तर्गत नन्दप्रयाग से 10 किलोमीटर की चढ़ाई पर है। बैरासकुण्ड शब्द का उल्लेख पुराणों में कहीं भी नहीं हुआ है। किन्तु इसके अस्तित्व के सन्दर्भ कहीं न कहीं अवश्य मिलते हैं। इसलिये आज यह तीर्थ स्थल शोध का विषय बना हुआ हैै।

गोपेश्वर महादेव मंदिर:

गोपेश्वर महादेव मंदिर' कंडा बागेश्वर Gopeshwar Mahadev Temple (kanda, Bageshwar)... - Uttarakhand Darshan

उत्तराखंड राज्य,  बागेश्वर जिले के धपोलासेरा में भद्रवती नदी के तट पर स्थित गोपेश्वर महादेव मंदिर हैं| यहाँ महाशिवरात्रि पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता हैं। दूर-दूर के गांवों से भक्त मंदिर में आते हैं। सुबह से ही जलाभिषेक को लोगों की लंबी लाइन लगी। पूरे दिन मंदिर में पूजा अर्चना चलती रही। मंदिर के पुजारी रावल लोग हैं। स्थानीय लोगो का कहना हैं कि मंदिर की स्थापना द्वापर युग से हुई है। इस मंदिर में सहस्त्र घट पानी चढ़ाया जाता है। इसके बाद लोगों की मन्नत पूरी हो जाती है।

मोटेश्वर महादेव मंदिर काशीपुर:

Mahadev Temple Is Wonderful Moteshwar Jyartiling - अद्भुत है मोटेश्वर महादेव मंदिर का ज्यार्तिलिंग - Amar Ujala Hindi News Live 

मोटेश्वर महादेव मंदिर भगवान भीम शंकर महादेव के रूप में भी जाना जाता है जो उत्तराखंड राज्य में   उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर गाँव में भगवान शिव का मंदिर है। शिवलिंग की मोटाई अधिक होने के कारण ही इसे मोटेश्वर के नाम से जाना जाता है| प्राचीन काल में, इस जगह को डाकिनी राज्य के रूप में जाना जाता था। यहाँ, भगवान शिव एक ज्योतिर्लिंग के रूप में देखा जा सकता है जिसे भीम शंकर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर में भगवान शिव पीठासीन देवता हैं लेकिन इस प्राचीन मंदिर में कुछ अन्य देवताओं की भी पूजा की जाती है। इसमें भगवान गणेश, कार्तिकेय स्वामी, देवी पार्वती, देवी काली, भगवान हनुमान और भगवान भैरव शामिल हैं। मोटेश्वर महादेव मंदिर का धार्मिक महत्व है और यह मंदिर शिव भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय है।

शिव कालेश्वर महादेव मंदिर:

Kaleshwar Mahadev Temple / Regimental Temple, Lansdowne - Timings, History, Pooja & Aarti schedule,

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में लैंसडाउन एक छावनी शहर तथा  सुंदर,  सुदूर पहाड़ी स्टेशन है जिसमें बहुत सारे हरियाली और लंबे पेड़ हैं। भारत लॉर्ड  लैंसडाउन के वाइसराय के बाद स्थापित  किया गया। (14 जनवरी 1845 – 3 जून 1 9 27), पहाड़ी स्टेशन में शहर और आसपास के क्षेत्रों के भीतर कई पर्यटक स्थल हैं। इस क्षेत्र में कई  शिव मंदिर स्थापित  हैं।भगवान शिव का एक सदियों पुराना मंदिरकालेश्वर महादेव मंदिर लैंसडाउन लोगों के साथ-साथ बहादुर गढ़वाल रेजिमेंट के लिए भक्ति का केंद्र है। मुख्य लैंसडाउन शहर के पास स्थित, कालेश्वर महादेव का नाम ऋष कालून के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने यहां ध्यान किया।

क्यूंकालेश्वर महादेव मंदिर पौडी गढ़वाल:

देवभूमि के क्यूंकालेश्वर महादेव..जहां यमराज ने कठोर तप से शिवजी को प्रसन्न किया था (king kaleshwar mahadev pauri garhwal)

क्यूंकालेश्वर महादेव मंदिर पौडी गढ़वाल से लगभग 2200 मीटर की उचाई में स्थित हैं। क्यूंकालेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन 8 वीं शताब्दी का मंदिर है। यह अलकनंदा घाटी के किनारे बसा हुआ है और यहाँ  हिमपात पर्वतमाला का सुन्दर दृश्य दिखाई देता हैं। इसकी वास्तुकला कुछ हद तक केदारनाथ के समान है। मंदिर भगवान शिव, देवी पार्वती, गणपति, कार्तिकेय, भगवान राम, देवी सीता और लक्ष्मण की मूर्तियों को दर्शाता है।

लाखामंडल मंदिर:

लाखामंडल का महाभारतकालीन शिव मंदिर - Kafal Tree

लाखामंडल मंदिर एक प्राचीन मंदिर है जो कि उत्तराखंड के देहरादून जिले के जौनसर-बावार क्षेत्र में स्थित है । यह मंदिर देवता भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित हैं एवम् समुन्द्रतल से इस मंदिर की ऊँचाई 1372 मीटर है | यह मंदिर शक्ति पंथ के बीच बहुत लोकप्रिय है क्योंकि उनका मानना ​​है कि इस मंदिर की यात्रा उनके दुर्भाग्य को समाप्त कर देगी । मंदिर अद्भुत कलात्मक काम से सुशोभित है । लाखामंडल मंदिर का नाम दो शब्दों से मिलता है। लाखामंडल मंदिर को उत्तर भारतीय वास्तुकला शैली में बनाया गया है , जो कि गढ़वाल, जौनसर और हिमाचल के पर्वतीय क्षेत्रों में मामूली बात है | मंदिर के अंदर पार्वती के पैरों के निशान एक चट्टान पर देखे जा सकते हैं, जो इस मंदिर की विशिष्टता है ।

नीलकंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश:

नीलकंठ महादेव मंदिर हरिद्वार के दर्शन की पूरी जानकारी - Neelkanth Temple In Hindi

नीलकंठ महादेव मंदिर , भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन पवित्र मंदिर है, जो कि उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम (राम झुला या शिवानन्द झुला) से किलोमीटर की दुरी पर मणिकूट पर्वत की घाटी पर स्थित है । मणिकूट पर्वत की गोद में स्थित मधुमती (मणिभद्रा) व पंकजा (चन्द्रभद्रा) नदियों के ईशानमुखीसंगम स्थल पर स्थित नीलकंठ महादेव मन्दिर एक प्रसिद्ध धार्मिक केन्द्र है। नीलकंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश के सबसे पूज्य मंदिरों में से एक है | यह मंदिर समुन्द्रतल से1675 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। नीलकंठ महादेव मंदिर में बड़ा ही आकर्षित शिव का मंदिर बना है एवम् मंदिर के बाहर नक्काशियो में समुन्द्र मंथन की कथा बनायी गयी है। नीलकंठ महादेव मंदिर के मुख्य द्वार पर द्वारपालो की प्रतिमा बनी है।

कमलेश्वर महादेव मंदिर पौड़ी गढ़वाल:

कमलेश्वर महादेव मन्दिर - श्रीनगर गढ़वाल

कमलेश्वर महादेव मंदिर उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में श्रीनगर क्षेत्र में स्थित अतिप्राचीनतम शिवालयों में से एक महत्वपूर्ण शिवालय है। कमलेश्वर महादेव मंदिर एक स्थान है , जहां भगवान विष्णु भगवान शिव की पूजा करते हैं और सुदर्शन चक्र के साथ आशीषें होती हैं। स्कन्दपुराण के केदारखण्ड के अनुसार त्रेतायुग में भगवान रामचन्द्र रावण का वध कर जब ब्रह्महत्या के पाप से कलंकित हुये तो गुरु वशिष्ट की आज्ञानुसार वे भगवान शिव की उपासना हेतु देवभूमि पर आये इस स्थान पर आकर उन्होने सहस्त्रकमलों से भगवान शिव की उपासना की जिससे इस स्थान का नाम “कमलेश्वर महादेव” पड़ गया।

ओणेश्वर महादेव मंदिर टिहरी गढ़वाल:

May be an image of outdoors and temple

ओणेश्वर महादेव मंदिर जनपद टिहरी गढ़वाल के विकासखंड प्रताप नगर के पट्टी ओण के मध्य स्थित ग्राम पंचायत देवाल में स्थित प्राचीन एवम् धार्मिक मंदिर  है। ओणेश्वर महादेव भगवान शिव स्वरुप है। ओणेश्वर महादेव मंदिर श्रधा , विश्वास , प्रगति और उन्नति का प्रतीक है। इस मन्दिर में श्रीफल के अतिरिक्त और किसी भी चीज की बली नहीं दी गई और आज भी मात्र एक श्रीफल और चावल अपने ईष्ट को पूजने का काम सभी श्रद्धालू करते आ रहे हैं । ओणेश्वर महादेव मंदिर के पश्वा (जिन पर देवता अवतरित होते हैं) उनमें मुख्य रूप से ओनाल गांव के नागवंशी राणा एवं खोलगढ़ के पंवार वंशज व अन्य कई प्रमुख जाति पर अवतरित होते हैं तथा देवता की पूजा के लिए ग्राम सिलवाल गांव के भट्ट जाति के बाह्मण एवं ग्राम जाखणी, पट्टी भदूरा के सेमवाल जाति के ब्राह्मण हैं। पूजा वैसे तो सभी कर सकते हैं किन्तु देवता के पूजा के लिए सिलवाल गांव के मुण्डयाली वंशज भट्ट ब्राह्मण और ग्राम जाखणी के हरकू पण्डित के वंशज की खास जिम्मेदारी मन्दिर पूजा के लिए रहती है।

सत्येश्वर महादेव मंदिर टिहरी गढ़वाल:

सत्येश्वर महादेव मन्दिर, बौराड़ी, नई टिहरी, टिहरी गढ़वाल

सत्येश्वर महादेव मन्दिर प्रमुख हिन्दू मंदिर है जो कि बौराड़ी नई टिहरी की ढाल पर स्थित है। यह मंदिर लगभग 200 साल पुराना है। सत्येश्वर मन्दिर परिसर में तीन छोटे , दो मध्यम और एक मुख्य मन्दिर है । छोटे वाले मन्दिरों में से एक “भैरवबाबा का मंदिर” है तथा बाकी के दो मन्दिरों में कुछ स्थापना संबधी मतभेद के कारण किसी मूर्ति की स्थापना नहीं हो पायी है । इसके अलावा मुख्य मन्दिर में एक विशाल शिवलिंग और उसके पीछे माता लक्ष्मी और विघ्न हर्ता गणेश जी की मूर्तियां स्थापित हैं। शिवरात्री के अवसर पर मंदिर में भक्तो की भीड़ का तांता लगा रहता है।

ताड़केश्वर महादेव मंदिर पौड़ी गढ़वाल:

देवभूमि के इस मंदिर में विदेशों से आते भक्त, यहां जागृत रूप में निवास करते हैं महादेव (story of tarkeshwar temple uttarakhand)

ताड़केश्वर महादेव मंदिर पौड़ी गढ़वाल जिले के लैंसडाउन क्षेत्र में स्थित पवित्र धार्मिक स्थान है। ताड़केश्वर महादेव मंदिर भगवान् शिवजी को समर्पित है। ह मंदिर समुन्दरी तल से 2092 मीटर ऊँचाई पर स्थित है। ताड़केश्वर धाम मन्दिर 5 किमी. की चौड़ाई मे फैला हुआ है। यह मंदिर बलूत और देवदार के पेड से घिरा हुआ है जो कि प्रकति की सुंदरता के लिये बहुत ही अच्छा है । साथ ही यहाँ कई पानी के छोटे छोटे झरने बहते हैं । ताड़केश्वर महादेव मंदिर सिध्द पीठों में से एक है और इसे एक पवित्र स्थल माना जाता है।

बिनसर महादेव मंदिर रानीखेत:

Binser mahadev Ranikhet - YouTube

बिनसर महादेव मंदिर एक लोकप्रिय हिंदू मंदिर है । यह मंदिर रानीखेत से लगभग 20 किमी की दूरी पर स्थित है । कुंज नदी के सुरम्य तट पर करीब साढ़े पांच हजार फीट की ऊंचाई पर बिनसर महादेव का भव्य मंदिर है। समुद्र स्तर या सतह से 2480 मीटर की ऊंचाई पर बना यह मंदिर हरे-भरे देवदार आदि के जंगलों से घिरा हुआ है । हिंदू भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर का निर्माण 10 वीं सदी में किया गया था। महेशमर्दिनी, हर गौरी और गणेश के रूप में हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियों के साथ निहित, इस मंदिर की वास्तुकला शानदार है। बिनसर महादेव मंदिर क्षेत्र के लोगों का अपार श्रद्धा का केंद्र है।

मुक्तेश्वर महादेव मंदिर:

मुक्तेश्वर मंदिर उत्तराखंड

मुक्तेश्वर महादेव मंदिर उत्तराखंड के नैनीताल जिले के मुक्तेश्वर के सर्वोच्च बिंदु के ऊपर स्थित है । यह मंदिर “मुक्तेश्वर धाम या मुक्तेश्वर” के नाम से भी जाना जाता है । मंदिर में प्रवेश करने के लिए पत्थर की सीढ़ियों से पहुंचा जा सकता है और यह मंदिर समुद्र तल से 2315 मीटर की ऊँचाई पर कुमाऊं पहाड़ियों में है । मुक्तेश्वर का नाम 350 साल पुराने शिव के नाम से आता है , जिसे मुक्तेश्वर धाम के रूप में जाना जाता है , जो शहर में सबसे ऊपर , सबसे ऊंचा स्थान है। मंदिर के निकट “चौली की जाली” नामक एक चट्टान है।

टिम्मरसैंण महादेव चमोली:

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का एलान, टिम्मरसैंण महादेव गुफा के दर्शन के लिए नहीं होगी इनरलाइन पास की आवश्यकता

टिम्मरसैंण महादेव भगवान शिव की एक गुफा है जो उत्तराखंड के चमोली जिले के नीती गांव में स्थित है। यह गुफा जम्मू और कश्मीर के अमरनाथ मंदिर की तरह प्राकृतिक रूप से प्रसिद्ध है। क्योंकि यहाँ बर्फ का एक प्राकृतिक शिवलिंग है, इस स्थान को दिन प्रतिदिन लोकप्रियता मिल रही है।

कलेश्वर महादेव मंदिर:

कलेश्वर महादेव मंदिर – सबसे मशहूर मंदिरों में से एक है , जिसे भगवान शिव के लिए बनाया गया था । यह मंदिर आकर्षण का केन्द्र है एवम् मंदिर में भगवान शिव का शिवलिंग शामिल हैं , जो स्वयं के आकार का है।भगवान शिव के प्रेमियों के लिए यह स्थान लोकप्रिय है । इस मंदिर के बारे में यह कहा जाता है कि 5000 वर्ष पहले इस स्थान पर कालून ऋषि तपस्या किया करते थे , उन्हीं के नाम पर इस मंदिर का नाम कलेश्वर पड़ा । 5 मई 1887 में गढ़वाल रेजिमेंट की स्थापना हुई और 4 नवंबर 1887 में रेजिमेंट की प्रथम बटालियन इस मंदिर पर पहुंची।

बिल्केश्वर महादेव मंदिर:

Bilkeshwar temple is very famous

बिल्केश्वर महादेव मंदिर – भगवान शिव शंकर का धाम है एवम् हरिद्वार के पास स्थित “बिल्व पर्वत” पर बना है। यह एक छोटा मंदिर है , जो सामान्य शिवलिंग और नंदी के साथ पत्थर से बना है एवम् यह मंदिर एक पहाड़ी क्षेत्र में जंगल से घिरा हुआ है । इस जगह में भगवान गणेश , भगवान हनुमान , महादेव और माता रानी के छोटे मंदिर भी स्थित है । यहाँ भगवान शिव के लिए बैल की पत्तियों की पेशकश करने और गंगा नदी के पानी के साथ शिवलिंग के अभिषेक करने की परंपरा है ।

दक्ष महादेव मंदिर हरिद्वार:

दक्षेस्वर महादेव मंदिर कनखल हरिद्वार

दक्ष/ दक्षेश्वर महादेव मंदिर कनखल हरिद्वार उत्तराखंड में स्थित है | यह बहुत ही पुराना मंदिर है , जो कि भगवान शिव को समर्पित है | यह मंदिर हरिद्वार से लगभग 4 कि.मी.दूर स्थित है | इस मंदिर का निर्माण 1810 AD में रानी धनकौर ने करवाया था और 1962 में इसका पुननिर्माण किया गया | इस मंदिर को “दक्षेश्वर महादेव मंदिर” एवम् “दक्ष प्रजापति मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है | मंदिर के बीच में भगवान शिव जी की मूर्ति लैंगिक रूप में विराजित है | यह मंदिर भगवान शिव जी के भक्तो के लिए भक्ति और आस्था की एक पवित्र जगह है | भगवान शिव का यह मंदिर देवी सती (शिव जी की प्रथम पत्नी) के पिता राजा दक्ष प्रजापति के नाम पर रखा गया है | इस मंदिर में भगवान विष्णु के पाँव के निशान बने (विराजित) है , जिन्हें देखने के लिए मंदिर में हमेशा श्रद्धालुओ का ताँता लगा रहता है।

जागेश्वर मंदिर का इतिहास:

श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी, आज से खुले जागेश्वर धाम के कपाट - the doors of jageshwar dham open from today - UP Punjab Kesari

जागेश्वर भगवान सदाशिव के बारह ज्योतिर्लिगो में से एक है । यह “आठवा” ज्योतिलिंग माना जाता है। इसे “योगेश्वर” के नाम से भी जाना जाता है। ऋगवेद में ‘नागेशं दारुकावने” के नाम से इसका उल्लेख मिलता है। महाभारत में भी इसका वर्णन है । जागेश्वर के इतिहास के अनुसार उत्तरभारत में गुप्त साम्राज्य के दौरान हिमालय की पहाडियों के कुमाउं क्षेत्र में कत्युरीराजा था | जागेश्वर मंदिर का निर्माण भी उसी काल में हुआ। इसी वजह से मंदिरों में गुप्त साम्राज्य की झलक दिखाई देती है । मंदिर के निर्माणकी अवधि को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा तीन कालो में बाटा गया है “कत्युरीकाल , उत्तर कत्युरिकाल एवम् चंद्रकाल”। अपनी अनोखी कलाकृति से इन साहसी राजाओं ने देवदार के घने जंगल के मध्य बने जागेश्वर मंदिर का ही नहीं बल्कि अल्मोड़ा जिले में 400 सौ से अधिक मंदिरों का निर्माण किया हैै।

टपकेश्वर मंदिर  देहरादून:

टपकेश्वर मंदिर देहरादून की पूरी जानकारी - Tapkeshwar Temple Information In Hindi

टपकेश्‍वर मंदिर एक लोकप्रिय गुफा मंदिर भगवान शिव को समर्पित है । टपकेश्वर मंदिर देहरादून शहर के बस स्टैंड से 5.5 किमी दूर स्थित एक प्रवासी नदी के तट पर स्थित है । यह मंदिर सिध्पीठ के रूप में भी माना जाता है | टपकेश्वर मंदिर में “टपक”एक हिन्दी शब्द है , जिसका मतलब है “बूंद-बूंद गिरना” । टपकेश्वर मंदिर एक प्राकर्तिक गुफा है , जिसके अन्दर एक शिवलिंग विराजमान है | यह कहा जाता है कि गुफा के अन्दर विराजित शिवलिंग पर चट्टानों से लगातार पानी की बूंदे टपकती रहती है तथा पानी की बुँदे स्वाभाविक तरीके से शिवलिंग पर गिरती है | जिस कारण इस मंदिर का नाम “टपकेश्वर मंदिर” पड़ गया | मंदिर के कई रहस्य हैं और मंदिर के निर्माण के ऊपर भी कई तरह की बातें होती रहती हैं | कोई कहता है कि यहाँ मौजूद शिवलिंग स्वयं से प्रकट हुआ है , तो कई लोग बताते हैं कि पूरा मंदिर ही स्वर्ग से उतरा है | यह माना जाता है कि मंदिर अनादी काल से इस स्थान पर विराजित है और यह भी माना जाता है कि यह पवित्र स्थान गुरु द्रोणाचार्य जी की तपस्थली है।

पंचेश्वर महादेव मंदिर, चम्पावत:

महादेव का प्रसिद्ध पंचेश्वर मन्दिर ।। लोहाघाट ।। चम्पावत ।। देवभूमि उत्तराखण्ड - YouTube

पंचेश्वर महादेव मंदिर लोहाघाट , उत्तराखंड से लगभग 38 कि.मी. की दूरी पर काली एवं सरयू नदी के संगम पर स्थित है | पंचेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव का एक पवित्र मंदिर है । इस मंदिर को स्थानीय लोगों द्वारा चुमू (ईष्ट देवता) के नाम से भी जाना जाता है । स्थानीय लोग चैमु की जाट की पूजा करते हैं । मंदिर में भक्त ज्यादातर चैत्र महीने में नवरात्रि के दौरान आते हैं और इस स्थल पर मकर संक्रान्ति के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन भी किया जाता है । पंचेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव का एक पवित्र मंदिर है | पंचेश्वर मंदिर में शिव की सुंदर मूर्ति और शिवलिंग नाग देवता के साथ स्थापित है। नदी के संगम पर डुबकी लगाना बड़ा ही पवित्र माना जाता है।

कपिलेश्वर महादेव मंदिर , पिथौरागढ़:

पिथौरागढ़ : हिमालयी पर्वतमाला का प्रवेश द्वार है पिथौरागढ़, इन चमत्कारिक मंदिरों को देखने खिचे चले आते हैं पर्यटक - News Today Network

कपिलेश्वर महादेव मंदिर टकौरा एवं टकारी गांवों के ऊपर “सोर घाटी” यानी“पिथौरागढ़ शहर “ में स्थित एक विख्यात मंदिर है । कपिलेश्वर महादेव मंदिर पिथौरागढ़ के ऐंचोली ग्राम के ऊपर एक रमणीक पहाड़ी पर स्थित है । 10 मीटर गहरी गुफा में स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है । एक पौराणिक कहावत के अनुसार , इस स्थान पर भगवान विष्णु के अवतार महर्षि कपिल मुनि ने तपस्या की थी इसीलिए इसे “कपिलेश्वर” के नाम से जाना गया । इस गुफा के भीतर एक चट्टान पर शिव , सूर्य व शिवलिंग की आकृतियाँ मौजूद हैं । यह मंदिर शहर से केवल 3 किमी दूरहै तथा यह मंदिर हिमालय पर्वतमाला का लुभावना दृश्य प्रस्तुत करता है ।

क्रांतेश्वर महादेव मंदिर , पिथौरागढ़:

क्रांतेश्वर महादेव मंदिर - Champawat | क्रांतेश्वर महादेव मंदिर Photos, Sightseeing -NativePlanet Hindi

क्रांतेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव का पवित्र मंदिर है , जो कि चंपावत शहर के पूर्व में एक ऊंचे पहाड़ी की चोटी पर स्थित है । क्रांतेश्वर महादेव मंदिर मुख्य चंपावत शहर से 6 किमी दूर स्थित है और यह समुद्र तल से 6000 मीटर की ऊंचाई पर बना है । यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है क्योंकि यह मंदिर के नाम से स्पष्ट हो जाता है। क्रांतेश्वर महादेव मंदिर को स्थानीय लोग “कणदेव” और “कुरमापद” नाम से भी संबोधित करते हैं । क्रांतेश्वर महादेव मंदिर अनोखी वास्तुशिल्प से निर्मित अद्भुत मंदिर है | पर्यटक के लिए क्रांतेश्वर महादेव मंदिर एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है क्योंकि यह स्थान भगवान द्वारा आशीषित है।

श्रीप्रकाशेश्वर महादेव मंदिर, देहरादून:

Shri Prakasheshwar Mahadev Temple (प्रकाशश्वेर महादेव मंदिर) Dehradun, Shri Prakasheshwar Mahadev Mandir, timings, location, how to reach.

उत्तराखंड में देहरादून-मसूरी मार्ग पर स्थित इस मंदिर में चढ़ावा न चढ़ाने की शर्त पर भगवान शिव के दर्शन होते हैं। यहाँ दान देने के लिए इस भव्य मंदिर में दानपात्र जैसी कोई व्यवस्था ही नहीं है। काफी ऊंचाई पर होने के कारण इस मंदिर से देहरादून वैली का सुंदर नजारा दिखाई देता है। यह मंदिर राजधानी देहरादून से 10‌ किमी. की दूरी पर मसूरी जाते समय रास्ते में पड़ता है। यहां परोसा जाने वाल प्रसाद इस मंदिर की एक और विशेषता है। यहां कड़ी चावल और चाय प्रसाद के रूप में दिया जाता है।

 

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