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Sunday, February 28, 2021
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30 जनवरी: आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की है पुण्यतिथि, जाने इनके जीवन से जुड़ी बातें

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आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि है। 30 जनवरी 1948 को गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी। नाथूराम गोडसे ने प्रार्थना स्थल पर बापू के सीने में एक के बाद एक कई गोलियां दाग दी थी, जिससे वहीं पर उनकी मृत्यु हो गई थी। देश के स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अविस्मरणीय योगदान से पूरी दुनिया सुपरिचित है। वे जीवन पर्यन्त देशवासियों के लिए आदर्श नायक बने रहे। अहिंसा की राह पर चलते हुए देश को अंग्रेजी दासता से मुक्ति दिलाने वाले गांधीजी ने पूरी दुनिया को अपने विचारों से प्रभावित किया। उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर कई किताबें भी लिखी, जो हमें आज भी जीवन की नई राह दिखाती हैं। उनके अनुभव, अहिंसा का उनका सिद्धांत, उनके विचार आज भी उतने ही सार्थक हैं, जितने उस दौर में थे। उनके जीवन के तीन महत्वपूर्ण सूत्र थे, जिनमें पहला था सामाजिक गंदगी दूर करने के लिए झाड़ू का सहारा। दूसरा, जाति-पाति और धर्म के बंधन से ऊपर उठकर सामूहिक प्रार्थना को बल देना। तीसरा, चरखा, जो आगे चलकर आत्मनिर्भरता और एकता का प्रतीक माना गया। महात्मा गांधी के विचारों में ऐसी शक्ति थी कि विरोधी भी उनकी तारीफ किए बगैर नहीं रह सकते थे। ऐसे कई किस्से सामने आते हैं, जिससे उनकी ईमानदारी, स्पष्टवादिता, सत्यनिष्ठा और शिष्टता की स्पष्ट झलक मिलती है।

महात्मा गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर सन् 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हिन्दू परिवार में हुआ। पिता करमचंद गांधी और मां पुतलीबाई द्वारा उनका नाम मोहनदास रखा गया, जिससे उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी हुआ। महात्मा गांधी की माता अत्यधिक धार्मिक महिला थी, अत: उनका पालन वैष्णव मत को मानने वाले परिवार में हुआ और उन पर जैन धर्म का भी गहरा प्रभाव रहा। यही कारण था कि इसके मुख्य सिद्धांतों जैसे- अहिंसा, आत्मशुद्ध‍ि और शाकाहार को उन्होंने अपने जीवन में उतारा था।

महात्‍मा गांधी ने भारतीय स्‍वतंत्रता के लिए किए जाने वाले अन्‍य अभियानों में सत्‍याग्रह और अहिंसा के विरोध जारी रखे, जैसे कि ‘असहयोग आंदोलन’, ‘नागरिक अवज्ञा आंदोलन’, ‘दांडी यात्रा’ तथा ‘भारत छोड़ो आंदोलन’। गांधी जी के इन सारे प्रयासों से भारत को 15 अगस्‍त 1947 को स्‍वतंत्रता मिल गई।

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