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Monday, October 26, 2020
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बैंक में नौकरी नहीं मिली तो खुद का ही फर्जी ‘स्टेट बैंक ऑफ इंडिया’ खोल लिया

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कुडलोर. तमिलनाडु का एक जिला. यहां पर पुलिस ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी एसबीआई की एक फर्जी शाखा का भंडाफोड़ किया है. इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. फर्जी शाखा खोलने का मास्टर माइंड एसबीआई की एक पूर्व कर्मचारी का बेटा है. पुलिस मामले में जांच कर रही है.

बैंक खोलने वाले के माता-पिता थे एसबीआई कर्मचारी

इंडिया टुडे की खबर के अनुसार, कुडलोर जिले के पनरुति में कमल बाबू नाम के एक 19 साल के लड़के पर एसबीआई की फर्जी शाखा खोलने का आरोप है. पुलिस ने बताया कि कमल के माता-पिता एसबीआई के कर्मचारी थे. पिता का 10 साल पहले निधन हो गया था. जबकि मां दो साल पहले एसबीआई से रिटायर हुई थीं. कमल कोई काम नहीं करता था. उसने पिता की जगह नौकरी के लिए बैंक में फॉर्म दिया था. लेकिन उसे नौकरी नहीं मिली. ऐसे में उसने खुद का ही बैंक खोलने का फैसला किया. वह बचपन से ही अपने माता-पिता के साथ बैंक जाया करता था. इस तरह से बैंक के बारे में काफी नॉलेज थी.

एक कस्टमर ने पुरानी ब्रांच में बताया तो खुला राज़

पुलिस के अनुसार, कमल ने तीन महीने पहले पनरुति बाजार नाम से एसबीआई की शाखा खोली थी. एसबीआई के एक कस्टमर ने नई शाखा देखी तो उसने पुरानी ब्रांच में इस बारे में बात की. उस बैंक के ब्रांच मैनेजर ने अपने जोनल हेड से नई ब्रांच खुलने के बारे में पता किया. जोनल हेड ने बताया कि पनरुति में तो एसबीआई की कोई नई ब्रांच नहीं खुल रही.

मैनेजर की शिकायत के बाद एसबीआई के अधिकारी नई ब्रांच के दफ्तर में गए. वहां दफ्तर को देखकर हैरान रह गए. क्योंकि वहां सब कुछ ऑरिजनल बैंक जैसा ही था. यह सब देखकर पुलिस में शिकायत की गई.

फर्जी ब्रांच में सब कुछ असली बैंक सा

पुलिस कार्रवाई में कमल बाबू, उसके साथी 52 साल के मणिकम और 42 साल के कुमार को गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में पता चला कि कमल ने बैंक खोलने की योजना बनाई. मणिकम ने बैंक स्टांप वगैरह तैयार की जबकि कुमार ने बैंक की स्टेशनरी, पासबुक, चालान तैयार किया. फर्जी शाखा के लिए कमल ने कंप्यूटर, लॉकर और बाकी सैटअप खरीदा था. साथ ही पनरुतू बाजार ब्रांच नाम से वेबसाइट भी बनाई गई.

आरोपी बोला- चूना लगाना नहीं, बैंक खोलना था मकसद

पुलिस की अभी तक की जांच में सामने आया है कि इस फर्जी ब्रांच से अभी तक पैसा का कोई लेनदेन नहीं हुआ था. ऐसे में किसी के भी पैसे नहीं डूबे. पुलिस ने कहा कि आरोपियों ने लॉकडाउन के दौरान ब्रांच खोली. उन्हें लगा कि इस दौरान किसी को पता नहीं चलेगा. पूछताछ में कमल बाबू ने बताया कि उसका मकसद लोगों को चूना लगाना नहीं था. वह तो खुद का बैंक खोलना चाहता था. इसलिए उसने यह कदम उठाया.

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