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Sunday, October 25, 2020
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हरियाणा किसान आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले गुरनाम, कहते हैं- ‘मोदी सरकार या तो कानून वापस ले या किसानों को सीधे गोली मार दे’

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कुरुक्षेत्र जिले के चढूनी गांव के रहने वाले गुरनाम सिंह पिछले दो महीनों में हरियाणा में चार बड़े प्रदर्शन कर चुके हैं। इन प्रदर्शनों की शुरुआत 20 जुलाई से हुई थी, जब 15 हजार ट्रैक्टरों के साथ हरियाणा के किसान सड़कों पर उतर आए थे। गुरनाम सिंह बताते हैं, ‘केंद्र सरकार जून में तीन अध्यादेश लेकर आई। यह वह दौर था जब हम लोग कोरोना के डर से घरों से भी नहीं निकल रहे थे, लेकिन जब हमने इन कानूनों के प्रावधान देखे तो सड़कों पर निकलना हमारी मजबूरी हो गई। ये कानून खेती और किसानी की कब्र खोदने के लिए बनाए गए हैं।’

जिन तीन कानूनों का जिक्र गुरनाम सिंह कर रहे हैं वे कानून संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुके हैं। ये तीन कानून हैं: कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020, कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020।

बिहार राज्य का उदाहरण देते हुए गुरनाम सिंह कहते हैं, ‘मंडियों से बाहर खरीद की व्यवस्था अगर इतनी ही अच्छी थी तो बिहार के किसान आज तक समृद्ध क्यों नहीं हुए? वहां 2006 से यह व्यवस्था लागू हो चुकी है जो अब देशभर में करने की तैयारी है, लेकिन बिहार के किसानों की स्थिति इतनी खराब है कि वहां का चार एकड़ का किसान भी यहां के दो एकड़ के किसान के खेत में मजदूरी करने आता है। इसका मुख्य कारण यही है कि वहां किसानों को एमएसपी नहीं मिलता।’

जब प्रधानमंत्री लगातार बोल रहे हैं कि एमएसपी की व्यवस्था से कोई छेड़छाड़ नहीं होने वाली और यह बनी रहेगी तो फिर भी किसान विरोध क्यों कर रहे हैं? इस पर गुरनाम सिंह कहते हैं, ‘इस बात की तो हम दाद देते हैं कि प्रधानमंत्री बोलते बहुत अच्छा हैं। उनके पास बोलने की अद्भुत कला है। बस दिक्कत यह है कि वे झूठ बहुत बोलते हैं। अगर ये एमएसपी नहीं खत्म कर रहे तो हमारी छोटी-सी मांग मान लें और एमएसपी की गारंटी का कानून बना दें। कानून में बस इतना लिख दें कि एमएसपी से कम दाम पर खरीदना अपराध होगा, हम लोग कल ही अपना आंदोलन वापस ले लेंगे।’

इन कानूनों को गुमराह करने वाला बताते हुए किसान नेता कहते हैं, ‘इसमें सबसे बड़ा झूठ तो यही है कि इस कानून से किसानों को अपना माल कहीं भी बेचने की छूट मिलेगी। यह सरासर झूठ है, क्योंकि किसानों के पास यह छूट 1977 से ही है। ऐसा ही झूठ फसल के भंडारण को लेकर भी कहा जा रहा है कि अब किसान अपनी उपज स्टॉक कर सकेगा। यह स्टॉक का फायदा अडानी जैसे लोगों को होगा जो अब जमाखोरी करके दाम निर्धारित कर सकेंगे।’

गुरनाम सिंह अपनी बात पूरी करते उससे पहले ही उनके फोन पर एक तस्वीर आती है। यह तस्वीर दिखाते हुए वे कहते हैं, ‘देखिए सरकार की चालाकी। अभी-अभी कई फसलों का एमएसपी बढ़ा दिया गया है। यह बढ़त भी बस ऊंट के मुंह में जीरे जितनी ही है, लेकिन इसे ठीक ऐसे समय पर किया है जब किसान आंदोलन लगातार तेज हो रहा है, जबकि यह एमएसपी हर साल अक्टूबर में आया करती है।

इससे सरकार दिखाना चाहती है कि एमएसपी को लेकर वह कितनी गंभीर है और इस पर काम कर रही है, लेकिन सरकार की नीयत अगर साफ है तो बस यही बात कानून में क्यों नहीं लिख दी जाती कि एमएसपी व्यवस्था बनी रहेगी। इतना हो जाए तो किसान बेफिक्र हों, लेकिन इन्होंने तो किसानों को मार डालने वाले कानून बना दिए हैं, इसलिए किसानों ने भी ठान ली है। अब या तो सरकार ये कानून वापस ले या फिर हमें सीधे ही गोली मार दे।

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