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Wednesday, April 21, 2021
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उत्तराखंड का स्वादिष्ट फल हैं घिंगारू, आइये जाने इसके औषधीय गुण

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आज हम आपको एक फल के बारे में बताने जा रहे हैं जो बेहद स्वादिष्ट होता है। इस फल का नाम है ‘घिंगारू’ (Nepal firethorn or Himalayan firethorn)। यह पौधा दुनियाँ में ई. एशिया, उत्तर- पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में भारत के पहाड़ी राज्यों उत्तराखण्ड, हिमांचल प्रदेश के साथ ही नेपाल व चायना में भी पाया जाता है। समुद्र सतह से 1700 से 3000 मीटर तक की ऊचाई तक में पाया जाने वाला यह पौधा प्राकृतिक रूप से खुली ढलानों, खेत की मौड़ों, घास के मैदानों, सड़कों के किनारे, झरनों व नदी नालों के किनारे तथा पहाड़ी घाटियों में भी पाया जाता है। घिंगारू में वर्ष में एक बार फल आता है। प्रतिवर्ष मार्च से मई माह के बीच घिंगारू में सफेद रंग के फूल आते हैं, यह फूल काफी सारे गुच्छों की शक्ल में आते हैं।

घिंगारू(Himalayan firethorn) के औषधीय गुण:

घिंगारू के फूल से मधु मक्खियों द्वारा बनाया गया शहद, अपने आप में औषधीय गुणों से भरपूर होता है। यह शहद रक्त में शुगर की मात्रा को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस लिए शुगर के मरीजों के लिए खासा लाभदायक होता है। फूल के परिपक्व होने के बाद घिंगारू में छोटे- छोटे हरे रंग के दाने लगते हैं, जो पकने बाद नारंगी लाल रंग के हो जाते हैं। इन पके फलों का स्वाद खट्टा मीठा होता है। शक्ल में यह लाल रंग के फल छोटे सेब के आकार के होते हैं। जिन्हें बच्चे छोटा सेब ही कहते हैं। घिंगारू के फल में कुछ ऐसे बेशकीमती तत्व पाये जाते हैं, जो हार्ट यानी हमारे दिल के लिए एक टॉनिक का काम करते हैं। दही के साथ फलों से तैयार पाउडर एवं सूखे फलों का प्रयोग खूनी पेचिश का उपचार करने में किया जाता है। घिंगारू का फल पौष्टिक एवं औषधीय गुणों वाला होता है, जो कई बिमारियों के निवारण जैसे- ह्रदय संबंधी विकार, हाइपर टेन्शन, मधुमेह, रक्तचाप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। घिंगारू के ताजा फलों का प्रयोग पूर्ण रूप से सुरक्षित है।

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