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Monday, January 25, 2021
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आपकी और मेरी जेब से चलती है देश की जीडीपी; इसमें गिरावट से भी हमारी जेब का है गहरा संबंध

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केंद्र सरकार के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने सोमवार को जीडीपी के आंकड़े जारी कर सबको चौंका दिया। सबको अंदाजा था कि जीडीपी दर गिरने वाली है। पिछले पांच महीने कोरोना के लॉकडाउन का असर था ही। लेकिन, गिरावट अंदाजे से बढ़कर निकली।

अर्थशास्त्री सोच रहे थे कि गिरावट 20% के आसपास रहेगी, लेकिन वह 23.9% यानी करीब 24% रही। इसके बाद भी ज्यादातर लोग अब भी सोच रहे हैं कि देश की अर्थव्यवस्था में आई गिरावट से उनकी जेब पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनकी जिंदगी जैसी थी, वैसी ही रहेगी। जबकि सच यह नहीं है। आइए, बताते हैं यह कैसे आप पर असर डालने वाली है?

सबसे पहले, क्या है नए आंकड़े?

  • कोरोनावायरस के चलते इस वित्त वर्ष के शुरुआती तीन महीने (अप्रैल-जून) लॉकडाउन में रहे। इसका असर यह हुआ कि गुड्स और सर्विसेस के कुल उत्पादन में भी गिरावट आई, जिसे हम जीडीपी कहते हैं। दरअसल, यह ही बताता है कि देश तरक्की कर रहा है या संकट में है।
  • नए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल अप्रैल-जून पीरियड की तुलना में इस साल खेती-किसानी को छोड़कर बाकी सभी सेक्टरों में गिरावट दर्ज हुई। यह गिरावट 24% के करीब रही है। यानी अब तक हर साल पिछले साल के मुकाबले जीडीपी बढ़ती थी, इस बार घट गई है।
  • जीडीपी में 8 सेक्टर महत्वपूर्ण हैं। इनमें कृषि सेक्टर की ग्रोथ रेट 3.4 प्रतिशत रही है। इसके अलावा बाकी सभी सेक्टर-माइनिंग सेक्टर (-23.3%), मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर (-39.3%), कंस्ट्रक्शन सेक्टर (-50.2%) की गिरावट आई है।

अब जानिए इस गिरावट का क्या असर होगा?

  • अर्थशास्त्रियों का कहना है कि वित्त वर्ष की पहली तिमाही में गिरावट को देखकर कह सकते हैं कि इसका असर पूरे साल रहने वाला है। यानी इस साल भारतीय अर्थव्यवस्था में 7 प्रतिशत तक गिरावट हो सकती है। इससे रोजगार के अवसरों में गिरावट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
  • 1990 के दशक में जब भारत ने अपना बाजार दुनियाभर के लिए खोला, तब से हमने औसत 7 प्रतिशत की दर से तरक्की की है। अब, इस बार इतनी ही गिरावट होने वाली है। मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग, कंस्ट्रक्शन जैसे जिन सेक्टरों में गिरावट हुई है, वह सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार देने वाले सेक्टर है।
  • प्रत्येक सेक्टर में गिरावट को देखते हुए कहा जा सकता है कि उस क्षेत्र से जुड़े लोगों का उत्पादन और कमाई घट रही है। इसका मतलब यह है कि ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी नौकरी गंवा चुके हैं या गंवाने वाले हैं। साथ ही नई नौकरियों को हासिल करने में भी दिक्कत हो सकती है।

जीडीपी की घट-बढ़ के लिए क्या जिम्मेदार है?

  • जीडीपी को बढ़ाने या घटाने के चार महत्वपूर्ण इंजन होते हैं। पहला है, आप और हम। आप जितना खर्च करते हैं, वह हमारी अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान देता है। पिछले साल यानी 2019-20 की पहली तिमाही की जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी लगभग 56% है।
  • दूसरा ग्रोथ इंजन होता है प्राइवेट सेक्टर की बिजनेस ग्रोथ। यह जीडीपी में 32% योगदान देती है।
  • इसी तरह सरकारी खर्च (11%) इसका तीसरा ग्रोथ इंजन है। सरकारी खर्च से मतलब यह है कि सरकार का गुड्स और सर्विसेस प्रोड्यूस करने में क्या योगदान है।
  • जीडीपी का चौथा और महत्वपूर्ण इंजन है- नोट डिमांड का। इसके लिए भारत के कुल एक्सपोर्ट को कुल इम्पोर्ट से घटाया जाता है। भारत के केस में एक्सपोर्ट के मुकाबले इम्पोर्ट ज्यादा है, इस वजह से इसका इम्पैक्ट जीडीपी पर निगेटिव ही रहा है।

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