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Wednesday, April 21, 2021
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चौथी बार राष्ट्रपति शासन की और बढ़ा महाराष्ट्र, सरकार पलटने की रणनीति पर BJP ने शुरू किया काम

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महाराष्ट्र से जुड़ी खबर सामने आई है। राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने के कारण साफ दिखाई दे रहे हैं। महाराष्ट्र में 100 करोड़ की वसूली, ट्रांसफर के नाम पर रिश्वतखोरी और विपक्ष के 100 सवालों में घिरी महा विकास अघाड़ी सरकार पर विपक्ष का दबाव लगातार बढ़ रहा है। 2 मई को पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम की घोषणा के साथ ही सूबे में कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर राष्ट्रपति शासन लगवाने की भाजपा की तैयारी है। जानकारी के अनुसार भाजपा का प्लान ‘A’ यानी अजित पवार को फिर से भाजपा के साथ लाने का उनका प्रयास विफल होता नजर आ रहा है। भाजपा को लग रहा था कि अजित पवार NCP विधायकों के बड़े खेमे को तोड़कर पार्टी से अलग हो जाएंगे। NCP सुप्रीमो शरद पवार के पास सिर्फ 7-8 विधायक ही बचेंगे। ऐसे में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की सरकार अल्पमत में आ जाएगी और भाजपा विधानसभा में NCP के बागी विधायकों की मदद से किसी तरह बहुमत साबित कर सरकार बना लेगी। लेकिन शरद पवार की महाराष्ट्र पर कड़ी नजर और उनकी सख्ती के चलते NCP में टूट होने के आसार अब कम हैं। यही वजह है कि भाजपा ने प्लान ‘B’ पर काम करना शुरू किया है। ऐसे में भाजपा को महाराष्ट्र में पहले राष्ट्रपति शासन लगवाने और फिर मध्यावधि चुनाव कराने का रास्ता सही लग रहा है।

राज्य में सबसे पहले 17 फरवरी 1980 को और 28 सितंबर 2014 को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। राज्य में पहली बार 17 फरवरी 1980 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार को विधानसभा में पर्याप्त बहुमत होने के बावजूद सदन भंग कर दिया गया था। राज्य में 17 फरवरी से 8 जून 1980 तक अर्थात 112 दिन तक राष्ट्रपति शासन लगा था। दूसरी बार राज्य में 28 सितंबर 2014 को राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। उस वक्त राज्य की सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी ने अपने सहयोगी दल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) सहित अन्य दलों के साथ अलग हुआ था और विधानसभा को भंग किया गया था। दूसरी बार राज्य में 28 सितंबर 2014 से लेकर 30 अक्टूबर यानी 32 दिनों तक राष्ट्रपति शासन रहा था। तीसरा राष्ट्रपति शासन 12 नवंबर 2019 में लगाया गया था। राज्य के  विकट राजनीतिक हालात को देखते हुए राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राष्ट्रपति से इसकी सिफारिश की थी, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया था। वहीं केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भी इसकी मंजूरी दे दी थी।

राष्ट्रपति शासन:

किसी राज्य का नियंत्रण भारत के राष्ट्रपति के पास चला जाना। लेकिन प्रशासनिक दृष्टि से केंद्र सरकार इसके लिए राज्य के राज्यपाल को कार्यकारी अधिकार प्रदान करती है। संविधान के अनुच्छेद 352, 356 और 365 में राष्ट्रपति शासन से जुड़े प्रावधान दिए गए हैं। अनुच्छेद 356 के अनुसार राष्ट्रपति किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा सकते हैं यदि वे इस बात से संतुष्ट हों कि राज्य सरकार संविधान के मुताबिक काम नहीं कर रही है। अनुच्छेद 365 अनुसार राज्य सरकार केंद्र सरकार द्वारा दिए गए संवैधानिक निर्देशों का पालन नहीं करती तो उस हालात में भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। अनुच्छेद 352 के तहत आर्थिक आपातकाल की स्थिति में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।

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