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Sunday, November 1, 2020
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गरीबी और विकलांगता के बाद भी हार नही मानी ,पहले प्रयास में ही बनीं आईएएस :IAS Umuul Khair

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उम्मुल खैर बचपन से ही विकलांगता का शिकार रही हैं फिर भी उन्होंने अपनी तमाम बाधाओं को पार करते हुए 2016 में यूपीएससी का परीक्षा निकाला और 420वी रैंक हासिल कर सबको चकित कर दिया । एक बहुत ही साधारण परिवार से आने वाली Ummul Khair एक बेहद गरीब परिवार से सम्बद्ध रखती थी लेकिन उम्मुल ने कभी हार नही मानी और अपनी लगन और कठिन परिश्रम से इन्होंने अपनी काबिलियत का प्रमाण देते हुए एक आईएएस बनने तक का सफर तय किया। उम्मुल बचपन से ही अजैले बोन डिसऑर्डर नामक बीमारी से ग्रस्त थीं, इस बीमारी के चलते हड्डियां कमजोर हो जाती है और इंसान सही से चल फिर नहीं पाता है।

हड्डी कमजोर होने कारण जब भी बच्चा गिरता है तो उसकी हड्डियां टूट जाती है, इस तरह महज 28 साल की उम्र में उम्मुल की हड्डियां 15 बार गिरने के कारण टूट चुकी थी।

बचपन से ही करना पड़ा अनेक कठिनाइयों का सामना

उम्मुल का पूरा परिवार बचपन से ही आर्थिक तंगी से गुजर रहा था इनके पिता सड़क किनारे ठेला लगाकर मूंगफली बेचा करते थे । यह लोग दिल्ली के निजामुद्दीन के झुग्गियों में रहकर अपना गुजर बसर कर रहे थे लेकिन 2001 में उस इलाके की झुग्गियों के हटाए जाने के बाद उनका पूरा परिवार त्रिलोकपुरी में शिफ्ट हो गया । अभी इन्होंने अपनी जिंदगी को अच्छी तरह समझा ही नहीं था ,तभी इनके मां का देहांत हो गया और इनके पिता ने दूसरी शादी कर ली । अपनी सौतेली मां के साथ उम्मुल का अच्छा व्यवहार नहीं रहा इन्हें बात-बात पर दुत्कार और घृणा मिलती थी ।

पूरा परिवार उम्मुल के पढ़ाई के खिलाफ रहता था , वह कहते थे कि यह पढ़ कर क्या करेगी । आगे चलकर उम्मुल का घर में रहना मुश्किल हो गया और वह किराए का मकान लेकर रहना शुरू की , अपनी आर्थिक विषमताओं के कारण उम्मुल को बहुत परेशानियां हुईं और वो इससे निजात पाने के लिए बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपना गुजर बसर करने लगीं।

अपनी तकलीफों को याद करते हुए उम्मुल बताती हैं कि- मैं बहुत मुश्किल 100-200 रुपए कमा पाती थी । लेकिन तभी मुझे पता चला कि आईएएस एक बहुत ही कठिन परीक्षा होती है , मुझे लगा कि यह मेरी समस्या का निदान हो सकता है और मैंने ठान लिया कि मुझे अब आईएएस ही बनना है ।

बेहतर शिक्षा के लिए करना पड़ा संघर्ष

उम्मुल ने अपनी पांचवी तक की पढ़ाई एक दिव्यांग स्कूल से किया और फिर एक ट्रस्ट की मदद से उन्होंने अपनी आठवीं तक कि पढ़ाई पूरी की । आठवीं क्लास में इन्होंने एक स्कॉलरशिप पास किया जिससे इन्हें कुछ रकम मिले , इन पैसों की मदद से उम्मुल ने एक प्राइवेट स्कूल में अपना नामांकन कराया और वहां मैट्रिक की परीक्षा में 90% लाई । इसके बाद उम्मुल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन पूरा किया और साथ-साथ बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती रही।

Ummul Khair ने दिल्ली के जेएनयू से अपनी मास्टर और एम फिल पूरी की और साथ ही इन्होंने यूपीएससी की तैयारी जारी रखीं । अपने तमाम परेशानियों के बावजूद उम्मुल ने भरपूर मेहनत किया हो पहली बार में ही यूपीएससी की परीक्षा पास कर 420 रैंक हासिल किया।

वो कहती है कि मुझे अपने परिवार से अब शिकायत नहीं है और जरूरत होगा तो मैं उनकी देखरेख करने के लिए हमेशा तत्पर हूं।

इस तरह अपनी विकलांगता और आर्थिक तंगी को मात देकर यूपीएससी तक सफर पार करने वाली उम्मुल खैर हज़ारों लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत है ।

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