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Saturday, October 24, 2020
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Coronavirus Unlock-3: उत्तराखंड आने पर कोई प्रतिबंध नहीं, बस ध्यान में रखें ये नियम…

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उत्तराखंड आने पर प्रतिबंध न होने के बावजूद अनलॉक-3 में प्रदेश की ओर रुख करने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पंजीकरण कराना और इस पंजीकरण का बॉर्डर चेक पोस्ट पर सत्यापन इस परेशानी की बड़ी वजह है। प्रदेश सरकार ने राज्यों के बीच आवागमन को लेकर चार अगस्त को एसओपी जारी की थी। देहरादून, ऊधमसिंहनगर और हरिद्वार में कोरोना संक्रमण के अत्यधिक मामले सामने आने के कारण इस एसओपी में कुछ शर्तों को जोड़ा गया था।

इन शर्ताें में से एक स्मार्ट सिटी की वेबसाइट http://dsclservices.org.in/apply.php पर पंजीकरण कराने के बाद बॉर्डर चेक पोस्ट पर सत्यापन कराना होगा। लेकिन यहां आने वाले लोग इस वजह से ज्यादा परेशान हो रहे हैं।

हालांकि बस, ट्रेन से आने वाले लोगों के लिए यह शर्त नहीं है। इंडस्ट्री एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पंकज गुप्ता के मुताबिक, चेक पोस्ट पर चेकिंग के नाम पर लंबी-लंबी लाइन लग रही है। अनलॉक-3 में किसी तरह का कोई प्रतिबंध नही है तो फिर प्रदेश सरकार ने पंजीकरण की अलग से व्यवस्था क्यों की हुई है।

अब केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी पत्र के आधार पर अनलॉक-3 की नई एसओपी पर विचार किया जा रहा है। खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि प्रदेश सरकार जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहती।  स्मार्ट सिटी के वेब पोर्टल पर रजिस्टर कराना होगा। रजिस्टर प्रपत्र को सीमा पर चेक किया जाएगा। किसी तरह के ई परमिट, अनुमति आदि की जरूरत नहीं है।   बाहर से आने वालों को हर हाल में आरोग्य सेतू एप डाउनलोड करना होगा। हाई लोड कोविड-19 वाले शहरों से आने वालों को सात दिन के लिए संस्थागत क्वारंटीन होना होगा। सात दिन के लिए इन्हें होम क्वारंटीन में रहना होगा।

हाई लोड क्वारंटीन शहरों के अलावा अन्य शहरों से आने वालों को 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन होना होगा।  72 घंटे की आईसीएमआर की अधिकृत कोविड निगेटिव रिपोर्ट वालों को क्वारंटीन नहीं होना होगा। इन्हें अपनी मेडिकल रिपोर्ट स्मार्ट सिटी की वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी।  सात दिन के लिए किसी की मृत्यु, गंभीर बीमारी आदि की वजह से अगर बाहर से कोई व्यक्ति आता है तो उसे क्वारंटीन नहीं होना होगा।

वह घर से बाहर आ जा सकता है लेकिन सिर्फ उसी काम के लिए जिस काम के लिए वह आया है।   कामगार, कर्मचारी, विशेषज्ञ, सलाहकार आदि अगर बाहर से आते हैं तो उन्हें क्वारंटीन नहीं होना होगा। यह संबंधित संस्था की जिम्मेदारी होगी कि वह यह तय करें कि ऐसे व्यक्ति सिर्फ काम के स्थान से ठहरने के स्थान के बीच ही यात्रा करें। इन्हें स्मार्ट सिटी की वेबसाइट पर संस्था की ओर से जारी अधिकार प्रपत्र भी अपलोड करना होगा।

बाहर से अधिकारिक कारण से आने वाले केंद्रीय और राज्य सरकारों के मंत्रियों, मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीश आदि को क्वारंटीन नहीं होना होगा, लेकिन ये वह सुनिश्चित करेंगे की सोशल डिस्टेंस और अन्य नियमों का पालन हो। विदेशों से आने वाले भारतीय नागरिकों और पर्यटकों को सात दिन के लिए संस्थागत क्वांरटीन होना होगा और इसके बाद वे सात दिन के लिए होम क्वारंटीन रहेंगे।   गर्भवती महिलाएं, 65 साल से अधिक के वरिष्ठ नागरिक, गंभीर रोगी आदि को संस्थागत क्वारंटीन नहीं किया जाएगा। उन्हें 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन में रहने की अनुमति होगी।  आरटी, पीसीआर टेस्ट न कराने वाले अधिकतम 2000 लोग एक दिन में राज्य में प्रवेश कर सकेंगे।

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