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Wednesday, October 21, 2020
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पैंगोंग झील को लेकर चीन ने भारत की मुश्किल बढ़ा दी है

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लद्दाख में तनाव कम करने और लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर सेनाओं को पीछे हटाने को लेकर भारत और चीन बातचीत कर रहे हैं. अभी पैंगोंग झील और गोगरा घाटी को लेकर चर्चा हो रही है. लेकिन इसमें चीन ने नई अड़चन खड़ी कर दी है. इंडिया टुडे के शिव अरूर की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन पैंगोंग झील के बारे में बात ही नहीं करना चाहता. वह पैंगोंग झील के मसले को पूरी तरह से नकार रहा है. इस वजह से मामला बिगड़ता दिख रहा है. भारत और चीन के बीच 14-15 जुलाई को चौथे राउंड की मीटिंग हुई थी. उसमें भी चीन ने काफी ना-नुकुर की थी. और अब तो वह साफ-साफ मना कर रहा है.

गलवान में तेजी, गोगरा में ढिलाई और पैंगोंग में ढिठाई

चीन का यह रुख काफी महत्व रखता है. क्योंकि तनाव घटाने की प्रक्रिया के तहत उसने गलवान घाटी में पेट्रोल पॉइंट 14 और 15 के बीच पूरी तरह से सेना को हटा लिया. वहीं गोगरा घाटी में पेट्रोल पॉइंट 17A के पास सेना को हटाने की प्रक्रिया काफी धीमी है. लेकिन भारत की सबसे बड़ी चिंता पैंगोंग झील के पास चीनी सेना की मौजूदगी रही है. बातचीत के दौरान पैंगोंग पर बात न करने की चीन की जिद दिखाती है कि वह मई से पहले की स्थिति को बदलना चाहता है. यानी एलएसी पर बदलाव करना चाहता है.

चीन की अकड़ का इशारा करती घटनाएं

चीन की अकड़ को इस सप्ताह दो घटनाओं से देखा जा सकता है. पहला, चीनी राजदूत का कहना कि तनाव घटाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. पैंगोंग में चीनी सेना अपने इलाके में ही है. यह इस बात का संकेत है कि अब सेना कहीं और से पीछे नहीं हटेगी. पैगोंग झील के पास फिंगर चार से आठ के बीच काफी संख्या में चीनी सेना तैनात है

.दूसरा, चीनी सेना ने पिछले तीन सप्ताह में पैंगोंग के पीछे वाले इलाके में काफी सेना जुटाई है. साथ ही अक्साई चिन में सप्लाई बेस में बहुत कम समय में सेना को भेजने की तैयारी भी की है.

भारत भी चीन को लेकर सतर्क

भारतीय सेना भी चीन के बदले हुए मिजाज को हल्के में नहीं ले रही. उसकी ओर से कहा गया है कि पैंगोंग फिंगर इलाके में विस्तृत बातचीत न होने तक आगे नहीं बढ़ा जाएगा. 2 अगस्त को दोनों सेनाओं के बीच पांचवें राउंड की चर्चा है. लेकिन इससे एक दिन पहले यानी 1 अगस्त को दोनों पक्षों के रिश्तों में जमी बर्फ की झलक मिली. 1 अगस्त को चीनी सेना यानी पीपल्स लिबरेशन आर्मी दिवस होता है. आमतौर पर हर साल इस दिन चुशूल में दोनों सेनाओं के अधिकारी मिलते हैं. लेकिन 1 अगस्त 2020 को ऐसा नहीं हुआ. औपचारिक मैसेज भेजने के अलावा कुछ नहीं हुआ.

मई से है लद्दाख में तनाव

लद्दाख में मई के महीने से भारत-चीन में तनाव है. जून में यह तनाव गहरा गया था. गलवान घाटी में दोनों देशों की सेनाओं में हिंसक झड़प हो गई थी. इसमें 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे. हालांकि इसके बाद से तनाव कम करने की कोशिशें हो रही है. इसी कड़ी में सेनाओं के बीच कमांडर लेवल की मीटिंग हो रही है. भारत का साफ कहना है कि वह मई में तनाव शुरू होने से पहले जो हालात थे, वैसा ही चाहता है. वहीं चीन इसको लेकर आनाकानी कर रहा है.

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