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Tuesday, April 20, 2021
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GST मुआवजे को लेकर गैर-बीजेपी शासित 4 राज्यों ने PM को लिखी चिट्ठी, ‘स्थायी विकल्प’ की मांग की

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GST (Goods and Sevices Tax) मुआवजे के मुद्दे पर चार गैर-बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी थी. इस चिट्ठी में इन राज्यों ने केंद्र को उसके ‘संवैधानिक कर्तव्यों’ की याद दिलाते हुए जीएसटी मुआवजे को लेकर एक ‘स्थायी विकल्प’ ढूंढने को कहा है. केंद्र से कहा गया है कि वो जीएसटी मुआवजे में 2.35 लाख करोड़ के बकाए को भरे. यह चिट्ठी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई पलानीसामी, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लिखी है. उन्होंने मांग रखी है कि केंद्र सरकार राज्यों को बाजार से अलग-अलग से उधार लेने के बजाय खुद जरूरत के हिसाब से उधार ले और जीएसटी सेस को 2021/22 के पार बढ़ाकर बकाया भरा जाए.

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, बंगाल, केरल और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी ने इस मामले में जोर-शोर से केंद्र के सामने आवाज उठाई है. हालांकि, इन्होंने चिट्ठी नहीं लिखी है. चिट्ठी लिखने वाले मुख्यमंत्रियों ने कहा है कि अगर राज्य उधार लेंगे तो इसे चुकाने का बोझ बढ़ जाएगा और वो पहले ही आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं. केजरीवाल ने कहा, ‘राज्यों का शोषण करने वाला बोझ डाला जा रहा है, जो पहले ही रेवेन्यू कलेक्शन में कमी आने और कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में अतिरिक्त खर्च का बोझ उठा रहे हैं.’

पलानीसामी ने लिखा, ‘राज्यों को उधार लेने को कहा जा रहा है…ताकि मुआवजे की भरपाई की जा सके….यह प्रशासकीय तौर पर परेशानी है….और ज्यादा खर्चीला है.’ उन्होंने कहा कि रेटिंग एजेंसियों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि उधार कौन ले रहा है. वहीं केसी राव ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों को जीएसटी मुआवजा देने की अपनी जिम्मेदारी निभाने का वादा तोड़ने की स्थिति में है.

बता दें कि वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को बताया था कि जीएसटी संग्रह अगस्त महीने में 86,449 करोड़ रुपये रहा है, यह लगातार दूसरा महीना है जब जीएसटी संग्रह कम हुआ है. सालाना आधार पर जीएसटी संग्रह 12 प्रतिशत कम रहा. पिछले साल इसी महीने में माल एवं सेवा कर संग्रह 98,202 करोड़ रुपए था. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि अर्थव्यवस्था और सिकुड़ सकती है, जिससे कि मुआवजा भरना मुश्किल होगा.

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